दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए मंगलवार शाम 5 बजे चुनाव प्रचार पूरी तरह थम जाएगा। इसके साथ ही जिले में चुनावी रैलियों, रोड शो, जनसभाओं और प्रचार वाहनों का शोर शांत हो जाएगा। अब चुनावी जंग सीधे मतदाताओं के दरवाजे से निकलकर ईवीएम तक पहुंच चुकी है। अगले 48 घंटे तक जिले में साइलेंस पीरियड लागू रहेगा, जहां किसी भी दल या प्रत्याशी को प्रचार करने की अनुमति नहीं होगी।
30 जुलाई को सुबह 7 बजे से शुरू होगा मतदान
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई (गुरुवार) को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान होगा। शाम 6 बजे तक मतदान केंद्र पहुंचने वाले सभी मतदाताओं को वोट डालने का अधिकार मिलेगा, भले ही मतदान देर शाम तक जारी रहे।
3.56 लाख से ज्यादा मतदाता करेंगे लोकतंत्र का फैसला
इस उपचुनाव में कुल 3,56,651 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 1,88,959 पुरुष और 1,67,692 महिला मतदाता शामिल हैं। पहली बार मतदान करने वाले युवा मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है, जिन पर सभी राजनीतिक दलों की खास नजर बनी हुई है।
90 बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाता कर चुके हैं होम वोटिंग
चुनाव आयोग की विशेष व्यवस्था के तहत 90 बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाता पहले ही होम वोटिंग के माध्यम से अपना मतदान कर चुके हैं। इससे उन मतदाताओं को घर बैठे मतदान की सुविधा मिली, जो मतदान केंद्र तक पहुंचने में सक्षम नहीं थे।
कड़ी सुरक्षा के बीच होगा मतदान
मतदान को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और भयमुक्त बनाने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बल और प्रशासनिक अधिकारी पूरे जिले में तैनात रहेंगे। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा, वेबकास्टिंग और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी।
मतदान केंद्रों पर रहेंगी सभी जरूरी सुविधाएं
मतदाताओं की सुविधा के लिए सभी मतदान केंद्रों पर पेयजल, छाया, रैंप, व्हीलचेयर, शौचालय और प्राथमिक उपचार जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे बिना किसी भय, दबाव या प्रलोभन के अपने मताधिकार का उपयोग करें।
प्रचार खत्म, अब जनता के फैसले का इंतजार
करीब दो सप्ताह तक चले हाई-वोल्टेज चुनाव प्रचार के बाद अब चुनावी मुकाबला पूरी तरह मतदाताओं के हाथ में है। भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अब 30 जुलाई को ईवीएम का बटन दबाकर दतिया की जनता तय करेगी कि विधानसभा में उसका अगला प्रतिनिधि कौन होगा। लोकतंत्र के इस महापर्व के लिए प्रशासन भी पूरी तरह तैयार है और अब सभी की निगाहें मतदान प्रतिशत और चुनाव परिणाम पर टिकी हैं।

