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जंतर-मंतर प्रदर्शन केस: दिल्ली HC ने पूछा- क्या यह जनहित याचिका है?

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर कथित हमले और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में शुक्रवार दोपहर 2:30 बजे सुनवाई होगी। इस मामले पर अब मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) की पीठ के समक्ष सुनवाई की जाएगी।

सिंगल जज की बेंच ने उठाया अहम सवाल

जानकारी अनुसार, यह याचिका पहले जस्टिस प्रतीक जलान की एकल पीठ के समक्ष सूचीबद्ध थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह मामला जनहित याचिका (PIL) की प्रकृति का प्रतीत होता है। ऐसे में इसे मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष लंबित समान प्रकृति की याचिका के साथ सुना जाना उचित होगा।

सॉलिसिटर जनरल ने दी यह जानकारी

बता दें सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जंतर-मंतर की इसी घटना से जुड़ी एक अन्य जनहित याचिका पहले से ही मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष विचाराधीन है। इसे देखते हुए दोनों मामलों की संयुक्त सुनवाई की जा सकती है।

हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

वहीं सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा-

“क्या यह जनहित याचिका है? यदि आपके पास व्यक्तिगत लोकस (Locus Standi) नहीं है, तो आपको इसे जनहित याचिका के रूप में ही दायर करना चाहिए।”

अदालत की इस टिप्पणी से साफ है कि वह याचिका की प्रकृति और उसकी वैधानिकता पर भी विचार कर रही है।

क्या है मामला ?

याचिका में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर कथित हमले, सरकारी कार्य में बाधा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है। अब इस मामले पर सभी की नजरें मुख्य न्यायाधीश की पीठ में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

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