बालाघाट: मुख्यालय से लगे ग्राम नैतरा में लगभग 45 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन सामुदायिक भवन को लेकर की गई शिकायत अब राजनीतिक रंग लेती दिखाई दे रही है। भवन निर्माण स्थल को लेकर कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि बरसात के दौरान यहां जलभराव हो जाता है, इसलिए यह स्थान निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं है। वहीं, ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए इसे विकास कार्यों को बाधित करने की राजनीतिक कोशिश बताया है।
ग्राम पंचायत नैतरा के सरपंच संतोष लिल्हारे ने कहा कि सामुदायिक भवन के निर्माण के लिए गांव में कई स्थानों पर विचार किया गया था, लेकिन पर्याप्त और उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण वर्तमान स्थल का चयन सभी पंचों की सर्वसम्मति से किया गया। उन्होंने कहा कि भवन के निर्माण के बाद गांव के गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को शादी-विवाह, सामाजिक कार्यक्रमों तथा अन्य सामुदायिक आयोजनों के लिए स्थायी सुविधा उपलब्ध होगी।
सरपंच संतोष लिल्हारे ने बताया कि जिस स्थान को जलभराव वाला बताया जा रहा है, उसके आसपास लोग पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से निवास कर रहे हैं और आज तक कभी भी उनके घरों में बारिश का पानी नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि हाल की बारिश के दौरान गांव की पुलिया में नालों और शहरी नाले से आया कचरा फंस जाने के कारण पानी की निकासी बाधित हो गई थी। इसी वजह से पानी वापस भर गया और निर्माणाधीन भवन के समीप तक पहुंच गया, लेकिन सामुदायिक भवन जलमग्न नहीं हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस अस्थायी स्थिति को जानबूझकर राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है और शिकायत के माध्यम से विकास कार्य को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि पुलिया से समय पर कचरा हटा दिया जाता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।
गांव के कई ग्रामीणों ने भी पंचायत का समर्थन करते हुए कहा कि वे वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और उन्होंने कभी यहां स्थायी जलभराव की समस्या नहीं देखी। उनका कहना है कि पुलिया में कचरा फंसने के कारण पानी की निकासी प्रभावित हुई थी, जिसे आधार बनाकर सामुदायिक भवन के निर्माण का विरोध करना उचित नहीं है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से मांग की है कि शिकायत की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए तथा 45 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन सामुदायिक भवन का कार्य बिना किसी अनावश्यक बाधा के शीघ्र पूरा कराया जाए, ताकि गांव के लोगों को इसका लाभ समय पर मिल सके।

