नई दिल्ली। अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को रिलीज के महज दो दिन बाद ही ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। इस फैसले ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। फिल्म पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित बताई जा रही है।
फिल्म में आतंकवाद के दौर के दौरान पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों (फेक एनकाउंटर) और बड़ी संख्या में युवाओं की मौत के मुद्दे को दिखाया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, फिल्म में खालड़ा द्वारा किए गए उस दावे का भी उल्लेख है, जिसमें उन्होंने लगभग 25 हजार युवाओं के कथित फर्जी एनकाउंटर का मुद्दा उठाया था।
3 साल की रोक के बाद हुई रिलीज
बताया जा रहा है कि फिल्म लंबे समय तक रिलीज नहीं हो सकी थी और करीब तीन साल बाद इसे दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया गया। हालांकि, रिलीज के सिर्फ दो दिन बाद ही इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। अब तक प्लेटफॉर्म या फिल्म निर्माताओं की ओर से हटाए जाने के कारण पर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
फैसले पर उठे सवाल
फिल्म हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि अन्य लोग आधिकारिक स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं। जब तक संबंधित प्लेटफॉर्म या सक्षम प्राधिकरण की ओर से स्पष्ट कारण नहीं बताया जाता, तब तक हटाने के पीछे की वजह को लेकर अटकलें लगाना उचित नहीं होगा।
यदि किसी सरकारी एजेंसी या नियामक संस्था की भूमिका रही है, तो उसके संबंध में आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक होना आवश्यक है, ताकि किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
फिलहाल फिल्म को हटाने के पीछे की वास्तविक वजह सामने नहीं आई है। दर्शकों और फिल्म से जुड़े लोगों की नजर अब ओटीटी प्लेटफॉर्म और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान पर टिकी है।

