रोम: इटली में चुनाव सुधार से जुड़े एक प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार चुनाव में जीतने वाली पार्टी या गठबंधन को संसद में अतिरिक्त सीटें देने का कानून लाना चाहती है।
प्रस्ताव के मुताबिक, चुनाव में जीत हासिल करने वाली पार्टी या गठबंधन को संसद में 105 अतिरिक्त सीटें दी जा सकती हैं। सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से चुनावी जीत को संसद में मजबूत बहुमत में बदला जा सकेगा और राजनीतिक स्थिरता बढ़ेगी।
हालांकि, विपक्ष इस प्रस्ताव का विरोध कर रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि अतिरिक्त सीटों की व्यवस्था चुनावी प्रतिनिधित्व और वोटों के अनुपात को प्रभावित कर सकती है।
मेलोनी ने प्रस्ताव को लेकर कड़ा रुख अपनाया
इस बीच प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने प्रस्ताव को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने संकेत दिया है कि अगर कानून संसद से पारित नहीं होता है, तो वह इस्तीफा देने का फैसला कर सकती हैं।
अब सबकी नजर संसद में होने वाली वोटिंग पर है। इस वोटिंग से यह तय होगा कि मेलोनी सरकार का यह चुनावी सुधार आगे बढ़ता है या फिर प्रस्ताव को राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ता है।
हालांकि, इसके लिए उसे दोनों सदनों में कम से कम 42% वोट हासिल करने होंगे। सरकार का कहना है कि इससे देश में राजनीतिक स्थिरता आएगी और सरकारें बार-बार नहीं गिरेंगी। वहीं, विरोधियों का आरोप है कि इस कानून से चुनाव जीतने वाले गठबंधन को जरूरत से ज्यादा ताकत मिल जाएगी।
कानून लागू हुआ तो किस तरह बटेंगी सीटें?
इटली की संसद में कुल 600 सीटें हैं, जिनमें निचले सदन की 400 और सीनेट की 200 सीटें हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई पार्टी या गठबंधन कम से कम 42% वोट हासिल करके सबसे आगे रहता है तो उसे निचले सदन में 70 और सीनेट में 35 बोनस सीटें दी जाएंगी।
ये सीटें कुल संख्या के अंदर ही बांटी जाएंगी। इसका मतलब यह नहीं है कि निचले सदन में 400 के ऊपर 70 सीटें जोड़ दी जाएंगी। कुल सीटें 400 ही रहेंगी।

