दो साल से तबादले के लिए भटक रहे शिक्षक, न मंत्री सुन रहे, न अधिकारी; 28 जून की तय तारीख भी बीत गई
भोपाल। प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बालाघाट जिले के करीब 200 प्राथमिक शिक्षक पिछले दो वर्षों से स्थानांतरण आदेश का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही। शिक्षकों का आरोप है कि वे सैकड़ों बार स्कूल शिक्षा मंत्री, लोक शिक्षण संचालनालय और विभागीय अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रख चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।
शिक्षकों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर 28 जून तक लंबित आदेश जारी होने की उम्मीद जताई गई थी। तय तारीख निकल जाने के बाद भी आदेश जारी नहीं हुए, जिससे शिक्षकों में भारी नाराजगी है। उनका आरोप है कि फाइलें बिना किसी स्पष्ट कारण के रोकी जा रही हैं और सीएम समन्वय से जुड़े मामलों का हवाला देकर निर्णय टाला जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि दो वर्षों से लंबित प्रकरणों के कारण कई परिवार प्रभावित हो रहे हैं। अनेक शिक्षक अपने गृह जिले से दूर पदस्थ हैं और पारिवारिक व सामाजिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उनका आरोप है कि विभाग उनकी समस्याओं के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील बना हुआ है।
एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर भी उठे सवाल
प्रभावित शिक्षकों ने एजुकेशन पोर्टल 3.0 की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि तकनीकी खामियों और विसंगतियों के कारण कई पात्र शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर हो गए। यदि पोर्टल समय पर ठीक किया जाता और त्रुटियों का निराकरण होता, तो अधिकांश विवाद पैदा ही नहीं होते। शिक्षकों का आरोप है कि विभाग ने तकनीकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।

मंत्री और अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल
शिक्षकों का कहना है कि स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, प्रमुख सचिव संजय गोयल और लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह के स्तर पर समय रहते निर्णय लिए जाते तो यह स्थिति पैदा नहीं होती। उनका आरोप है कि विभागीय उदासीनता के कारण दो वर्षों से लंबित मामले आज भी फाइलों में दबे हुए हैं।
शिक्षकों का सवाल है कि आखिर बालाघाट के प्राथमिक शिक्षकों से ऐसी क्या नाराजगी है कि उनके तबादलों पर लगातार निर्णय टाला जा रहा है, जबकि अन्य जिलों में स्थानांतरण प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।
शिक्षकों का सवाल, अब जाएं तो जाएं कहां?
पीड़ित शिक्षकों का कहना है कि वे कई बार भोपाल आकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिल चुके हैं। ज्ञापन दिए, आवेदन किए और लगातार अनुरोध किया, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। उनका कहना है कि अब उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अपनी समस्या लेकर आखिर किसके पास जाएं।
शिक्षकों ने मांग की है कि लंबित स्थानांतरण आदेश तत्काल जारी किए जाएं, एजुकेशन पोर्टल 3.0 की तकनीकी खामियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन पात्र शिक्षकों को पोर्टल की त्रुटियों के कारण लाभ नहीं मिला, उन्हें विशेष अवसर देकर न्याय दिलाया जाए।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें
- दो वर्षों से लंबित स्थानांतरण आदेश तत्काल जारी हों।
- एजुकेशन पोर्टल 3.0 की तकनीकी खामियों की जांच हो।
- पोर्टल की त्रुटियों से वंचित शिक्षकों को विशेष अवसर दिया जाए।
- आदेशों में हुई देरी के कारण सार्वजनिक किए जाएं।
- लंबित मामलों के निराकरण के लिए समयबद्ध कार्रवाई हो।

