वाशिंगटन। अमेरिका की राजनीति एक बार फिर डिजिटल कंट्रोवर्सी के केंद्र में है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शेयर की गई AI-जनरेटेड तस्वीर, जिसमें वह खुद को ईसा मसीह जैसे रूप में दिखा रहे थे, अब इंटरनेशनल लेवल पर बहस और आलोचना का कारण बन गई है। इस तस्वीर में ट्रंप एक बीमार व्यक्ति को ‘हील’ करते नजर आ रहे थे, जिसने धार्मिक भावनाओं को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया।
AI वीडियो में ट्रंप पर ‘अटैक’ दिखाया
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे विवाद को नया मोड़ तब मिला जब ताजिकिस्तान में मौजूद ईरानी दूतावास ने उसी तस्वीर का एडिटेड वीडियो वर्जन शेयर किया। इस वीडियो में ईसा मसीह को गुस्से में ट्रंप पर हमला करते हुए दिखाया गया, जो मूल तस्वीर का बिल्कुल उल्टा नैरेटिव पेश करता है। यह क्लिप तेजी से वायरल हुई और इसे डिजिटल डिप्लोमेसी के नए रूप के तौर पर देखा जा रहा है।
धार्मिक संगठनों का विरोध
वहीं ट्रंप की इस पोस्ट पर अमेरिका के अंदर भी कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई ईसाई संगठनों, कैथोलिक धर्मगुरुओं और धार्मिक एक्टिविस्ट्स ने इसे ‘अनुचित’ और ‘धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला’ बताया। कुछ आलोचकों ने इसे सीधे तौर पर ईशनिंदा करार दिया और कहा कि इस तरह की सामग्री से समाज में गलत संदेश जाता है।
ट्रंप का बचाव—“मैं डॉक्टर की तरह दिख रहा था”
बता दें विवाद बढ़ने के बाद ट्रंप ने माना कि तस्वीर उन्होंने ही पोस्ट की थी, लेकिन माफी मांगने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि तस्वीर का उद्देश्य धार्मिक नहीं था, बल्कि वह खुद को एक ‘हीलर’ या डॉक्टर के रूप में दिखा रहे थे। हालांकि, बढ़ते विरोध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजाक उड़ाए जाने के बाद उन्होंने पोस्ट हटा ली और कहा कि इसे लेकर लोगों में गलतफहमी हुई है।
यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि आज के दौर में AI और सोशल मीडिया किस तरह अंतरराष्ट्रीय राजनीति और धार्मिक मुद्दों को प्रभावित कर रहे हैं। एक साधारण पोस्ट कैसे ग्लोबल बहस और कूटनीतिक तकरार का कारण बन सकती है, यह इस मामले में साफ नजर आता है।

