चंडीगढ़। पंजाब में कथित रियल एस्टेट घोटाले और फर्जी Change of Land Use (CLU) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच और तेज कर दी है। 7 मई 2026 को की गई बड़ी छापेमारी के बाद अब एजेंसी ने GMADA (Greater Mohali Area Development Authority) के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर IAS संदीप कुमार को समन जारी किया है। यह मामला दो बड़े रियल एस्टेट ग्रुप सुनटेक सिटी (Indian Cooperative Housing Building Society) और Altus Space Builders Pvt Ltd से जुड़ा हुआ है, जिन पर फर्जी दस्तावेजों और लोगों को गुमराह कर करोड़ों रुपये जुटाने के गंभीर आरोप लगे हैं।
फर्जी सहमति पत्र बनाकर हासिल किया गया CLU
ED की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सुनटेक सिटी प्रोजेक्ट के लिए करीब 30.5 एकड़ जमीन के 15 जमीन मालिकों की कथित फर्जी सहमति पत्र (Consent Letters) तैयार किए गए।
एजेंसी के अनुसार, इन दस्तावेजों पर जमीन मालिकों के नकली हस्ताक्षर और फर्जी अंगूठे के निशान लगाए गए, जिसके आधार पर Change of Land Use (CLU) की मंजूरी हासिल की गई।
वहीं जांच एजेंसियों को शक है कि इस पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर मिलीभगत हुई और दस्तावेजों की जांच में गंभीर लापरवाही बरती गई।
बिना रजिस्ट्री वसूले गए 150 करोड़ रुपये से ज्यादा
बता दें ED का आरोप है कि फर्जी CLU के आधार पर प्रोजेक्ट लॉन्च कर निवेशकों और खरीदारों से 150 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूली गई। सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि कई लोगों से रकम लेने के बावजूद जमीन या संपत्ति की वैध रजिस्ट्री नहीं की गई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह पैसा किन खातों में ट्रांसफर हुआ और इसका इस्तेमाल कहां किया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि इसी विवादित CLU के आधार पर ‘La Canela’ और ‘District 7’ जैसे हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट विकसित किए गए। ED अब यह जांच कर रही है कि इन प्रोजेक्ट्स में निवेश करने वाले खरीदारों को कितनी सही जानकारी दी गई थी और क्या उन्हें जानबूझकर भ्रमित किया गया।
खरीदारों को गुमराह करने का आरोप
दूसरी ओर Altus Space Builders Pvt Ltd पर आरोप है कि कंपनी ने खरीदारों को यह दिखाया कि प्रोजेक्ट को GMADA से अंतिम CLU मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि बाद में संबंधित CLU रद्द कर दिया गया। इसके बावजूद निवेशकों से रकम वसूली जारी रही। मामले में कंपनी के प्रमोटर मोहिंदर सिंह को पहले ही घोषित अपराधी बताया जा चुका है।
ED रेड के दौरान बालकनी से फेंके गए 21 लाख रुपये
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला घटनाक्रम ED की छापेमारी के दौरान सामने आया। सूत्रों के अनुसार, एक ठिकाने पर रेड के समय 21 लाख रुपये नकद बालकनी से नीचे फेंक दिए गए। हालांकि ED टीम ने बाद में यह रकम बरामद कर ली। एजेंसी अब यह जांच कर रही है कि यह पैसा किस स्रोत से आया और इसे छिपाने की कोशिश क्यों की गई।
अधिकारियों और बिल्डरों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
मामले के सामने आने के बाद GMADA की कार्यप्रणाली और CLU मंजूरी प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों ने पूरे मामले में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मिलीभगत का आरोप लगाया है। अब सभी की नजर ED की आगामी कार्रवाई और पूछताछ पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
ED फिलहाल वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। एजेंसी बैंक खातों, प्रॉपर्टी रिकॉर्ड और डिजिटल दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही है।

