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अल-नीनो की दस्तक, भारत के लिए चेतावनी!

देशभर में इस बार गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया है। मई के महीने में ही कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। मध्यप्रदेश के ग्वालियर, नौगांव, खजुराहो और भोपाल जैसे शहरों में लू के थपेड़ों ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण प्रशांत महासागर में बनने वाली ‘अल-नीनो’ स्थिति है, जो वैश्विक मौसम चक्र को प्रभावित करती है। अल-नीनो दरअसल समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी की वह प्रक्रिया है, जिसका असर भारत सहित पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। इसका सबसे बड़ा प्रभाव मानसून पर देखने को मिलता है। भारत में सामान्य से कम वर्षा, लंबे समय तक गर्मी और सूखे जैसी परिस्थितियां अल-नीनो के दौरान बन सकती हैं। यही वजह है कि इस वर्ष मौसम विभाग लगातार सतर्क रहने की सलाह दे रहा है। मप्र में भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। दिन और रात दोनों के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट गहराने लगा है, जबकि शहरों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। किसानों की चिंता भी बढ़ी हुई है, क्योंकि यदि मानसून कमजोर रहा तो खरीफ फसलों पर सीधा असर पड़ेगा। सोयाबीन, धान और मक्का जैसी फसलें समय पर बारिश पर निर्भर रहती हैं। हालांकि मौसम विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि हर अल-नीनो पूरी तरह विनाशकारी नहीं होता। कई बार स्थानीय मौसम प्रणालियां और अरब सागर-बंगाल की खाड़ी से बनने वाले सिस्टम राहत दे देते हैं। फिर भी आने वाले महीनों में गर्मी और उमस का दबाव बना रह सकता है। ऐसे समय में सरकार और समाज दोनों को सतर्क रहना होगा। जल संरक्षण, बिजली की बचत और स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। बदलते मौसम का यह संकेत केवल एक मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन के प्रति गंभीर चेतावनी भी है।

-मिलिंद ठाकरे

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