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पांच राज्यों में चुनाव से पहले आयोग सख्त, गृह जिले में तैनात अफसरों के होंगे तबादले

नई दिल्ली: पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। गृह जिले में तैनात और एक जिले में तीन साल का कार्यकाल पूरा कर चुके अधिकारियों को हटाना होगा। उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में लागू इन निर्देशों के तहत 30 नवंबर तक तबादले पूरे कर अनुपालन रिपोर्ट सौंपनी होगी।

आयोग ने मंगलवार को पांचों राज्यों के मुख्य सचिवों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर अपनी स्थानांतरण नीति का कड़ाई से पालन करने को कहा। निर्देशों का उद्देश्य चुनाव के दौरान प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।

तीन साल की तैनाती पर तबादला जरूरी

आयोग के अनुसार, पिछले चार वर्षों में किसी जिले में तीन साल का कार्यकाल पूरा कर चुके अधिकारियों का तबादला किया जाएगा। यह नियम उन अधिकारियों पर भी लागू होगा, जो निर्धारित समयसीमा तक तीन साल पूरे करने वाले हैं। गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तराखंड में 31 मार्च तक तथा उत्तर प्रदेश में 31 मई तक कार्यकाल पूरा करने वाले अधिकारी इसके दायरे में आएंगे।

जिले के भीतर पदोन्नति के बाद की गई सेवा भी तीन साल की अवधि में गिनी जाएगी। हालांकि, राज्य मुख्यालय में दी गई सेवा को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।

प्रशासन और पुलिस अधिकारी भी दायरे में

निर्देश जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ), रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ), सहायक रिटर्निंग ऑफिसर (एआरओ), एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार और ब्लॉक विकास अधिकारियों सहित चुनाव कार्यों से जुड़े अधिकारियों पर लागू होंगे। संभागायुक्त, नगर आयुक्त और विकास प्राधिकरणों के संबंधित अधिकारी भी इसके दायरे में आएंगे।

पुलिस विभाग में रेंज एडीजी, आईजी, डीआईजी, पुलिस आयुक्त, निरीक्षक और सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले अन्य अधिकारियों को भी नियमों का पालन करना होगा। हालांकि, कंप्यूटरीकरण, विशेष शाखा और प्रशिक्षण जैसे आंतरिक विभागों में तैनात पुलिस अधिकारियों को छूट दी गई है।

आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि कोई अधिकारी उस विधानसभा क्षेत्र या जिले में दोबारा तैनात नहीं किया जाए, जहां वह पिछले विधानसभा चुनाव या उसके बाद हुए उपचुनाव के दौरान तैनात था।

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30 नवंबर तक देनी होगी रिपोर्ट

डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षक जैसे सीधे चुनाव कार्यों से नहीं जुड़े कर्मचारी सामान्य तौर पर इन नियमों से बाहर रहेंगे। हालांकि, राजनीतिक पक्षपात की शिकायत जांच में सही पाए जाने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण में लगे कर्मचारियों के तबादले अंतिम सूची के प्रकाशन के बाद होंगे। असाधारण स्थिति में पहले तबादले के लिए आयोग की अनुमति जरूरी होगी। तबादले के बाद अधिकारियों को तुरंत कार्यभार छोड़ना होगा। मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को 30 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट सौंपनी होगी।

पांचों राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च से मई 2027 के बीच समाप्त हो रहा है।

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