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योगी कैबिनेट में नए चेहरों की एंट्री तय…जानें कौन-कौन हो सकता है शामिल ?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले योगी सरकार संगठन, जातीय संतुलन और क्षेत्रीय समीकरणों को मजबूत करने की रणनीति पर काम करती नजर आ रही है। सूत्रों के मुताबिक इस बार कैबिनेट में ऐसे नेताओं को जगह मिल सकती है जिनकी अपने समाज और क्षेत्र में मजबूत पकड़ मानी जाती है।

कौन-कौन हो शामिल ?

भूपेंद्र चौधरी: पश्चिमी यूपी की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता भूपेंद्र चौधरी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। मुरादाबाद से आने वाले भूपेंद्र चौधरी को योगी मंत्रिमंडल विस्तार में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा तेज है। जाट समुदाय में प्रभावशाली चेहरा माने जाने वाले भूपेंद्र संगठन और सरकार दोनों का लंबा अनुभव रखते हैं। वे पहले पंचायती राज कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और 2016 में पहली बार एमएलसी बने थे, जबकि 2022 में दोबारा विधान परिषद पहुंचे। भाजपा संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और पश्चिमी यूपी में जाट वोट बैंक पर प्रभाव को देखते हुए उन्हें सरकार में अहम भूमिका मिलने की संभावना जताई जा रही है।

मनोज पांडे: मनोज पांडे रायबरेली की ऊंचाहार सीट से लगातार तीसरी बार विधायक बने मनोज पांडे इन दिनों यूपी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाओं में हैं। कभी समाजवादी पार्टी के मजबूत ब्राह्मण चेहरे रहे मनोज पांडे ने 2024 में सपा छोड़ भाजपा का दामन थामा और अब उनकी नई राजनीतिक पारी सुर्खियों में है। 2012, 2017 और 2022 में सपा टिकट पर जीत दर्ज करने वाले मनोज पांडे अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री और पार्टी के मुख्य सचेतक भी रह चुके हैं। संगठन और प्रशासनिक अनुभव के साथ ब्राह्मण समाज में उनकी पकड़ को देखते हुए भाजपा उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।

कृष्णा पासवान: यूपी मंत्रिमंडल विस्तार में फतेहपुर की खागा सीट से भाजपा विधायक कृष्णा पासवान का नाम भी तेजी से चर्चा में है। दलित महिला चेहरे के रूप में पार्टी उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। चार बार विधायक रह चुकीं कृष्णा पासवान ने अपना पहला चुनाव 2002 में जीता था, इसके बाद 2012, 2017 और 2022 में भी जीत दर्ज की। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से विधानसभा तक का उनका सफर उन्हें जमीनी नेताओं की श्रेणी में खड़ा करता है। हाल ही में नवनिर्मित सड़क की गुणवत्ता जांचने के लिए फावड़े से सड़क खोदते उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद उनकी सक्रिय कार्यशैली की काफी चर्चा हुई। पार्टी संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और SC समाज में प्रभाव को देखते हुए उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है।

हंसराज विश्वकर्मा: हंसराज विश्वकर्मा का नाम यूपी मंत्रिमंडल विस्तार में तेजी से चर्चा में बना हुआ है। बूथ कार्यकर्ता से संगठन के बड़े पद तक पहुंचने वाले हंसराज फिलहाल वाराणसी भाजपा जिलाध्यक्ष हैं और पार्टी में उनकी मजबूत संगठनात्मक पकड़ मानी जाती है। ओबीसी वर्ग, खासकर विश्वकर्मा समाज के प्रभावशाली चेहरे के रूप में उनकी पहचान लगातार मजबूत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से आने के कारण उनकी दावेदारी को और मजबूती मिल रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक संगठन में लंबे अनुभव, जमीनी नेटवर्क और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ की वजह से उन्हें योगी कैबिनेट में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।

कैलाश राजपूत: यूपी मंत्रिमंडल विस्तार में कन्नौज की तिर्वा विधानसभा सीट से विधायक कैलाश राजपूत का नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है। लोधी समाज के प्रभावशाली ओबीसी चेहरे के रूप में पहचान रखने वाले कैलाश राजपूत को भाजपा संगठन में मजबूत जनाधार वाला नेता माना जाता है। खास बात यह है कि उन्होंने अखिलेश यादव के राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र में भाजपा की पकड़ मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। पार्टी रणनीति में ओबीसी समीकरण को साधने के लिए उनका नाम काफी अहम माना जा रहा है। लंबे राजनीतिक अनुभव और क्षेत्रीय प्रभाव को देखते हुए उन्हें योगी मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है।

सुरेंद्र दिलेर: यूपी मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे युवा चेहरे के तौर पर सुरेंद्र दिलेर का नाम तेजी से उभर रहा है। अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट से 2024 के उपचुनाव में पहली बार विधायक बने सुरेंद्र ने महज 31 साल की उम्र में राजनीति में मजबूत पहचान बना ली है। दलित समाज से आने वाले सुरेंद्र राजनीतिक विरासत वाले परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके दादा किसान लाल दिलेर हाथरस से चार बार सांसद और पांच बार विधायक रहे, जबकि उनके पिता राजवीर दिलेर भी सांसद और विधायक रह चुके हैं। युवा नेतृत्व, जमीनी पकड़ और SC समाज में प्रभाव को देखते हुए भाजपा उन्हें नई पीढ़ी के बड़े चेहरे के रूप में आगे बढ़ा सकती है।

जातीय समीकरण पर खास फोकस

सूत्रों के मुताबिक, संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय संतुलन को खास महत्व दिया गया है। जिसमें 1 ब्राह्मण चेहरा, 3 OBC नेता और 2 दलित चेहरे शामिल किए गए है। इस रणनीति को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़े सामाजिक समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है।

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