भोपाल: राजधानी के एमपी नगर प्रेस कॉम्प्लेक्स स्थित नेशनल हेराल्ड की जमीन से बेदखली के मामले में जिला कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) द्वारा दायर बेदखली का केस खारिज कर दिया। बीडीए ने जमीन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए यह केस दायर किया था।
1981 में एजेएल को मिली थी जमीन, 1992 में बंद हुआ अखबार
नेशनल हेराल्ड की प्रकाशन कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को वर्ष 1981 में प्रेस कॉम्प्लेक्स में 1.14 एकड़ जमीन आवंटित हुई थी, जहां से हिंदी दैनिक नवजीवन का प्रकाशन होता था। 1992 में अखबार बंद हो गया था। कर्मचारियों के वेतन-भत्तों का मामला अभी भी जबलपुर हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
2001 में बनी इमारत, अलग-अलग हिस्से बेचने का आरोप
आरोप है कि प्रकाशन बंद होने के बाद 2001 में नई दिल्ली की गंगा एंटरप्राइजेज के नरेंद्र कुमार मित्तल ने कथित पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर जमीन पर बड़ी इमारत बनवा ली और उसके हिस्से कई लोगों को बेच दिए। भोपाल में हरमहेंद्र सिंह बग्गा और संजय सिन्हा उनके पार्टनर के रूप में काम करते रहे।

2014 में बीडीए ने जारी किया था नोटिस
जमीन के दुरुपयोग को लेकर बीडीए ने 2014 में कंपनी को नोटिस जारी किया था। तत्कालीन चेयरमैन मोतीलाल वोरा ने जवाब भी दिया, लेकिन बीडीए ने उसे असंतोषजनक मानते हुए आवंटन निरस्त कर बेदखली के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद इमारत के हिस्से खरीदने वालों ने अपने दावे पेश किए और कुछ ने हाईकोर्ट से स्थगन भी ले लिया, जिससे मामला लंबा खिंचता गया।
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संपत्ति हड़पने का आपराधिक केस भी विचाराधीन
इधर, नेशनल हेराल्ड की संपत्ति और मशीनरी हड़पने के आरोप में नरेंद्र कुमार मित्तल के खिलाफ आपराधिक मामला भी भोपाल कोर्ट में चल रहा है, जिसमें उन्हें भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। वहीं, पूर्व पार्टनर हरमहेंद्र सिंह बग्गा सहित दो अन्य खरीदारों ने इमारत में खरीदे हिस्से पर मालिकाना हक के लिए सिविल केस दायर कर रखे हैं, जो अलग-अलग कोर्ट में विचाराधीन हैं।

