नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बताया है कि वर्ष 2019 से जुलाई 2026 के बीच 36 देशों से कुल 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में भगोड़े अपराधियों के प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय स्तर की प्राथमिकता बनाते हुए इस दिशा में व्यापक अभियान चलाया गया।
प्रत्यर्पण प्रक्रिया को मिली नई गति
सरकार का कहना है कि पहले प्रत्यर्पण प्रक्रिया कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियों के कारण धीमी रहती थी। इसी स्थिति को बदलने के लिए भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम सहित कई कानूनी सुधार किए गए, जिससे विदेशों में छिपे आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूती मिली। साथ ही विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
वैश्विक सहयोग और तकनीक पर जोर
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, सरकार ने वैश्विक सहयोग, आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल पर आधारित रणनीति अपनाई। इसके तहत इंटरपोल नेटवर्क का व्यापक उपयोग किया गया। जनवरी 2025 में शुरू किए गए BHARATPOL प्लेटफॉर्म के जरिए 1,400 से अधिक केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियों को इंटरपोल से जोड़ा गया, जिससे सूचनाओं के आदान-प्रदान की प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी तेज हुई।
संपत्ति जब्ती और ऑपरेशन त्रिशूल
सरकार ने यह भी बताया कि वर्ष 2019 से 2026 के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में भगोड़े आर्थिक अपराधियों की करीब 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई, जबकि 18,762 करोड़ रुपये की राशि की रिकवरी भी की गई। वहीं, ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ के तहत सैटेलाइट तकनीक, डिजिटल ट्रैकिंग और अन्य आधुनिक संसाधनों की मदद से विदेशों में छिपे कई आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की गई।

