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मध्यप्रदेश के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की हुई बैठक ,मध्यप्रदेश संयुक्त किसान मोर्चा का हुआ गठन

भोपाल:मध्यप्रदेश के विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक भोपाल में आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के किसानों की वर्तमान स्थिति, खेती की बढ़ती लागत, फसलों के उचित दाम, खाद की कमी, कर्ज, फसल नुकसान, सिंचाई, बिजली, भूमि अधिग्रहण, वनाधिकार तथा किसानों से जुड़े अन्य सवालों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे किसान संघर्षों को एकजुट करते हुए मध्यप्रदेश में एक मजबूत, व्यापक और निरंतर किसान आंदोलन खड़ा करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

17 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया

बैठक में 17 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लिया, जबकि प्रदेश के 10 अन्य किसान संगठनों ने बैठक में लिए गए निर्णयों के प्रति अपनी सहमति और समर्थन जाहिर किया। सभी प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि किसानों के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों का सामना करने के लिए किसान संगठनों के बीच व्यापक एकता और मजबूत समन्वय आज की महत्वपूर्ण जरूरत है।

किसानों की समस्याओं पर की गई चर्चा

बैठक की शुरुआत क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के बाबूसिंह राजपूत ने सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए की। अलग-अलग क्षेत्रों से आए अनुभवों से यह बात सामने आई कि किसानों की समस्याएं भले ही अलग-अलग रूपों में सामने आती हों, लेकिन खेती की बढ़ती लागत, फसलों का उचित मूल्य न मिलना, कर्ज, प्राकृतिक आपदाएं और सरकारी नीतियों का किसानों पर बढ़ता दबाव लगभग सभी क्षेत्रों में गंभीर चुनौती बना हुआ है। बैठक का संचालन किसान जागृति संगठन के इरफान जाफरी ने किया।

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किसानों के तत्काल सवालों पर संयुक्त संघर्ष

बैठक में प्रदेश के किसानों के सामने मौजूद तत्काल समस्याओं पर भी गंभीर चर्चा हुई। हाल की बारिश से खरीफ फसलों को हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा देने तथा फसल बीमा की राशि शीघ्र किसानों के खातों में उपलब्ध कराने की मांग की गई। इसी तरह डीएपी, यूरिया तथा अन्य आवश्यक रासायनिक खादों की कमी और अनुपलब्धता, खाद की कालाबाजारी तथा मिलावटी खाद की समस्या को तत्काल दूर करने की मांग उठाई गई।

 

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