Saturday, October 24, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsभोपाल के मास्टर प्लान-2047 से किसान और व्यापारी नाराज,मांगें नहीं मानने पर...

भोपाल के मास्टर प्लान-2047 से किसान और व्यापारी नाराज,मांगें नहीं मानने पर ट्रैक्टर-ट्रॉली भरकर आने की दी चेतावनी

भोपाल: राजधानी भोपाल में मास्टर प्लान-2047 का विरोध लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव और बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया से जुड़े प्रावधानों के खिलाफ शुक्रवार को भारी संख्या में किसान शाहपुरा स्थित टीएनसीपी कार्यालय पहुंचे।

भारतीय किसान संघ के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में किसानों ने उपसंचालक हरिओम महेश्वरी को अपनी आपत्तियां सौंपीं। किसानों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि ड्राफ्ट तैयार करते समय पंचायतों और सरपंचों को भरोसे में नहीं लिया गया।

किसान गीता प्रसाद पाटीदार ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर आएंगे और टीएनसीपी दफ्तर के सामने धरने पर बैठ जाएंगे। प्रदर्शन के दौरान किसान ‘किसान शक्ति जागेगी, सारी समस्या भागेगी’ लिखे बोर्ड लेकर पहुंचे। पुलिस-प्रशासन भी सक्रिय रहा।

रसूखदारों के इलाकों में निर्माण सीमा बढ़ाने पर सवाल

मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण को लेकर भी विरोधाभास का आरोप लगाया जा रहा है। आरोप है कि जिन इलाकों में आम लोगों के मकान हैं, वहां निर्माण पर रोक है और जमीनों की कीमतें लगभग स्थिर हैं।
दूसरी ओर, एलडीआर में शामिल उन क्षेत्रों में निर्माण की अनुमति पांच गुना तक बढ़ाने का प्रावधान किया गया है, जहां प्रभावशाली लोगों के बंगले और फार्म हाउस हैं।
आलोचकों का आरोप है कि इन क्षेत्रों में पहले से तय सीमा से अधिक निर्माण हो चुका है और नए ड्राफ्ट के प्रावधानों से उसे वैध करने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित प्रावधानों, मौजूदा निर्माण अनुमतियों और जमीन के रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है।

कैचमेंट में 40 हजार मकान, करीब 3 लाख आबादी का सवाल

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कैचमेंट क्षेत्र में कृषि उपयोग वाली श्रेणी में करीब 40 हजार मकान हैं, जिनमें लगभग 3 लाख लोग रहते हैं। यह भोपाल की करीब 24 लाख आबादी का लगभग 12.5 प्रतिशत है। दावा है कि मास्टर प्लान के प्रावधानों के अनुसार इन मकानों को अवैध माना जा सकता है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि इन मकानों पर नियमों के तहत कार्रवाई की स्थिति बनती है, तो इतनी बड़ी आबादी के पुनर्वास का क्या विकल्प होगा। इस मुद्दे पर मास्टर प्लान के संबंधित प्रावधानों, मकानों की कानूनी स्थिति और प्रशासन की योजना को स्पष्ट करना जरूरी है।

बीआईजेड-1 और बीआईजेड-2 जोन हटाने की मांग

किसान चाहते हैं कि उनकी कृषि भूमि का उपयोग खेती के लिए ही सुरक्षित रखा जाए। अनोखी सिंह पटेल के मुताबिक, किसानों के पास आजीविका का प्रमुख साधन खेती है। इसलिए उन्होंने भोजताल संरक्षण जोन-1
और जोन-2 को हटाने और कृषि भूमि का लैंडयूज कृषि ही रखने की मांग की है।

किसान भविष्य को लेकर चिंतित 

किसान मनोहर सिंह ठाकुर का कहना है कि रसूखदारों और बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए अधिकारी इस हिसाब से ड्राफ्ट कर तैयार कर रहा है कि मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2047 पर किसानों का शोषण होने का पूरा-पूरा अनुमान है जिससे उनको आर्थिक संकट से गुजरना पड़ेगा। बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए ग्रीन बेल्ट भोज वेटलैंड निर्माण की स्वीकृतियां दी गई है जो जांच का विषय है। व्यापार संघ की तरफ से अभिषेक जैन अब्बू ने भी कहा कि मास्टर प्लान को लेकर कई विसंगतियां है व्यापारियों में भी इस पर आपत्ति दर्ज की है उन्होंने मास्टर प्लान ड्राफ्ट तैयार होने से पहले व्यापारियों की समस्याओं का चर्चा करके विचार करने की बात कही।

संयुक्त संचालक बोलीं- आपत्तियों पर सुनवाई के लिए बुलाएंगे

टीएंडसीपी की संयुक्त संचालक इंदू त्रिपाठी ने बताया कि नियमानुसार 30 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। प्राप्त आपत्तियों को ऑनलाइन पोर्टल पर डिजिटाइज किया जाएगा। इसके बाद संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। आज किसान संघ ने नारेबाजी के दौरान 78 गांव की आपत्तिया संबंधी ज्ञापन उप संचालक  माहेश्वरी को सौंपा। माहेश्वरी ने कहा है कि ज्ञापन में दी गई बातों को वरिष्ठ अधिकारियों का अवगत कराकर कार्रवाई हेतु चर्चा की जाएगी और संबंधित पक्ष को सुनने के लिए समय सीमा के अंदर बुलाकर आपत्तियों पर विचार किया जाएगा।

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

18 to 24 October 2026
11 to 17 October 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन