Wednesday, November 4, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsनगरपालिका का चुनाव लड़ेंगे पूर्व मंत्री प्रदीप जायसवाल?

नगरपालिका का चुनाव लड़ेंगे पूर्व मंत्री प्रदीप जायसवाल?

बालाघाट: कहते हैं राजनीति में पद, प्रतिष्ठा और प्रभाव का अपना महत्व होता है, क्योंकि इन दिनों बालाघाट जिले का सियासी माहौल भी कुछ ऐसा ही कहता है। सत्ता में रहते हुए जिन नेताओं के इर्द-गिर्द अधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भीड़ रहती है, आज उन्हीं नेताओं की सत्ता और संगठन में परिस्थितियां बदलते ही राजनीतिक प्रभाव की वास्तविक परीक्षा शुरू हो चुकी है। वारासिवनी की राजनीति में पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता प्रदीप जायसवाल की इन दिनों नगरपालिका में बढ़ती सक्रियता कुछ ऐसे ही राजनीतिक सवालों को जन्म दे रही है। सवाल यह है कि क्या प्रदीप जायसवाल अब अपनी खोती हुई राजनीतिक जमीन को नगरपालिका के रास्ते दोबारा मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं? क्या वे नगरपालिका का चुनाव लड़ेंगे या फिर अपने बेटे के लिए माहौल तैयार कर रहे हैं।

नगर पालिका वारासिवनी में हस्तक्षेप से मजाक बन कर न रह जाएं प्रदीप जायसवाल!

दरअसल सोशल मीडिया से लेकर संगठन तक चर्चा है कि प्रदीप जायसवाल इन दिनों बार-बार वारासिवनी नगरपालिका पहुंचकर अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कोई विशेष पद न होने के बावजूद बार-बार नगरपालिका में अध्यक्ष और मुख्य नगरपालिका अधिकारी की कुर्सी पर बैठकर जनसमस्याएं सुनना तथा अधिकारियों को निर्देश देना यह दिखाता है कि नेता जी को अभी भी पद का बुखार चढ़ा हुआ है और यही वजह है कि उनकी सक्रियता भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, इन बैठकों का औचित्य क्या है, यह किसी को समझ नहीं आया। लेकिन एक निर्वाचित पद या आधिकारिक जिम्मेदारी के बिना इस तरह की सक्रियता कई सवाल खड़े कर रही है। आखिर नगरपालिका की कमान संभालने वाले जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच उनकी भूमिका क्या है?

नगरपालिका में जायसवाल की सक्रियता बनी जन चर्चा

प्रदीप जायसवाल का राजनीतिक सफर भी इस पूरे घटनाक्रम को दिलचस्प बनाता है। कभी कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे प्रदीप जायसवाल कांग्रेस सरकार में मंत्री पद तक पहुंचे। क्षेत्र की राजनीति में उनकी अपनी पहचान और प्रभाव रहा। लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। मगर लगता है कि अब वह खुद को ठगा सा महसूस करने लगे हैं। दल परिवर्तन के साथ उन्हें नई राजनीतिक चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है, लेकिन भाजपा की आंतरिक राजनीति के बीच अपनी पुरानी राजनीतिक हैसियत बनाए रखना उनके लिए कितनी बड़ी चुनौती है, वर्तमान हालातों से समझा जा सकता है।

यह भी पढ़ें: दिवाली से पहले श्रीनगर में आग का कहर, 80 अस्थायी घर जलकर राख; दो लोगों की दर्दनाक मौत

पुत्र के भाजयुमो जिला महामंत्री बनते ही नजर आई गुटबाजी!

प्रबल जयसवाल : भाजयुमो जिला महामंत्री बालाघाट

जन चर्चा है कि प्रदीप जायसवाल अपने पुत्र प्रबल जायसवाल को बालाघाट भाजयुमो का जिलाध्यक्ष बनाना चाहते थे, किंतु संगठन ने प्रबल को भाजयुमो जिला महामंत्री बना दिया। नतीजा यह निकला कि जिले और वारासिवनी क्षेत्र में नाराजगी खुल कर दिखाई देने लगी। क्षेत्र की जनता ने सोशल मीडिया में सवाल करने शुरू कर दिए कि क्या नेता पुत्रों को ही पद दिया जाना चाहिए? जिले में आम कार्यकर्ता जो किसी बड़े नेता के परिवार या राजनीतिक पहुंच वाला न हो तो क्या जमीनी कार्यकर्ता को पद नहीं मिल सकता? अनेकों सवाल और जनता की नाराजगी के बीच वारासिवनी क्षेत्र में पोस्टर और बैनर भी लगे, परंतु उसमें भी देखा गया कि प्रदीप जायसवाल के पुत्र के अलावा जिलाध्यक्ष की फोटो पोस्टर बैनर से गायब दिखी, जो कि क्षेत्र की राजनीतिक चर्चाओं में आजकल विषय बना हुआ है।

बहरहाल, प्रदीप जायसवाल की नगरपालिका में बढ़ती आवाजाही को महज जनसुनवाई मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वारासिवनी की राजनीति में आने वाले दिनों में यह जरूर स्पष्ट होगा कि यह सक्रियता जनता की समस्याओं के समाधान तक सीमित रहती है या फिर नगरपालिका में एक नई राजनीतिक पारी की कहानी लिखी जा रही है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कभी प्रदेश की सत्ता में मंत्री रहे प्रदीप जायसवाल अब वारासिवनी की नगरपालिका को अपनी अगली राजनीतिक प्रयोगशाला बनाने की तैयारी में हैं?

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

1 to 7 November 2026
25 to 31 October 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन