भोपाल। मप्र में आदिवासी क्षेत्रों में पंचायतों और ग्रामीणों के बीच सेतु का काम करने वाले करीब 5 हजार पेसा मोबिलाइजर्स की सेवाएं एक झटके में समाप्त कर दी गई हैं। केंद्र सरकार द्वारा पोषित ‘राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान’ (आरजीएसए) योजना की अवधि 31 मार्च 2026 को खत्म होने के बाद पंचायत राज संचालनालय ने फंड के अभाव का हवाला देते हुए सभी जिला पंचायत सीईओ को इन्हें कार्यमुक्त करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
दरअसल, इन पेसा मोबिलाइजर्स को आरजीएसए योजना के तहत मानदेय दिया जाता था। योजना की अवधि समाप्त होने के बाद केंद्र स्तर पर नई नीति और बजट को लेकर कोई निर्णय नहीं हो पाया, जिसके चलते राज्य सरकार ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में ग्राम पंचायतों के माध्यम से इन कर्मचारियों को बनाए रखना संभव नहीं है।
गौरतलब है कि अक्टूबर 2024 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पेसा मोबिलाइजर्स का मानदेय 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 8 हजार रुपए प्रतिमाह करने की घोषणा की थी। हालांकि केंद्रीय फंड जारी नहीं होने के कारण बढ़ा हुआ मानदेय तो दूर, अब उनकी नौकरी तक चली गई है। इस फैसले से आदिवासी अंचलों में पेसा एक्ट के क्रियान्वयन और ग्राम सभाओं से जुड़े कार्यों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं हजारों युवाओं के सामने अचानक रोजगार संकट खड़ा हो गया है।

