अटलांटा: अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में रूस की मौजूदगी को लेकर बड़ा कूटनीतिक विवाद सामने आया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ यूरोपीय देशों ने ग्रुप फोटो खिंचवाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद अमेरिकी मेजबानों को पहले से तय ‘फैमिली फोटो’ का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार यह बैठक 30 अक्टूबर 2026 को जॉर्जिया राज्य के अटलांटा में आयोजित की गई थी। इसकी अध्यक्षता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो कर रहे हैं। बैठक में वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा के लिए दुनिया के प्रमुख देशों के विदेश मंत्री जुटे हैं।
ब्रिटेन ने उठाया यूक्रेन युद्ध का मुद्दा
बैठक के दौरान ब्रिटेन के विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने सीधे रूस को घेरा। उन्होंने लावरोव के सामने ही यूक्रेन युद्ध का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस युद्ध में हमलावर कौन है, यह पूरी दुनिया जानती है। मिलिबैंड ने आरोप लगाया कि रूस यूक्रेन में निर्दोष नागरिकों की हत्या कर रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है।
ब्रिटिश विदेश सचिव ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध का असर सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है। इससे पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट, खाद्य असुरक्षा और आर्थिक दबाव बढ़ा है। उन्होंने जी-20 देशों से अपील की कि यूक्रेन में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए ठोस प्रयास किए जाएं और रूस पर आर्थिक व कूटनीतिक दबाव बनाए रखा जाए।
फैमिली फोटो पर बिगड़ी बात
जी-20 बैठकों में परंपरा रही है कि सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि एक साथ ‘फैमिली फोटो’ खिंचवाते हैं। अटलांटा बैठक में भी यही कार्यक्रम तय था, लेकिन यूरोपीय प्रतिनिधिमंडलों ने लावरोव के साथ एक फ्रेम में आने से इनकार कर दिया।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, जब यह साफ हो गया कि कुछ देश साझा तस्वीर में शामिल नहीं होना चाहते, तो अमेरिका ने ही फोटो सेशन रद्द करने का फैसला किया। अमेरिकी पक्ष का कहना था कि एक तस्वीर को कूटनीतिक विवाद का कारण बनाने से बेहतर है कि मुख्य एजेंडे पर फोकस किया जाए।
पोलैंड की मौजूदगी पर रूस की आपत्ति
बैठक में पोलैंड की भागीदारी पर भी रूस ने सवाल उठाए। दरअसल, पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोर्स्की ने दावा किया था कि अमेरिका ने पोलैंड को जी-20 का स्थायी सदस्य बनाने का प्रस्ताव दिया है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लावरोव ने कहा कि जी-20 आम सहमति से चलता है और किसी नए देश को आमंत्रित करने का फैसला भी इसी प्रक्रिया से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ और नाटो में पहले से ही पूर्वी यूरोप का प्रतिनिधित्व है, ऐसे में पोलैंड की मौजूदगी से कोई विशेष योगदान नहीं होगा।
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अमेरिका-रूस संबंधों पर भी नजर
इस बीच अमेरिका और रूस के संबंधों में नरमी के संकेत भी चर्चा में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में रूस पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है और रूसी डीजल आयात से जुड़े फैसले लिए हैं। वाशिंगटन का तर्क है कि इससे रूस को बातचीत की मेज पर बनाए रखा जा सकेगा।
हालांकि यूक्रेन और यूरोपीय देशों ने इसकी आलोचना की है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इसे पुतिन के लिए ‘उपहार’ बताया है। वहीं अमेरिका ने दूसरी तरफ यूक्रेन को दो अरब डॉलर से अधिक की पैट्रियट मिसाइलें देने की मंजूरी भी दी है, जिससे कूटनीतिक समीकरण और जटिल हो गए हैं।

