रतलाम: महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके विचारों और आदर्शों को देश और विदेश में भी याद किया जा रहा है, लेकिन हमारे ग्रामीण भारत में महात्मा गांधी के आदर्श आज भी जिंदा है। रतलाम के रूपाखेड़ा गांव में आज भी महात्मा गांधी के विचारों और आदर्शों का पालन किया जाता है। महात्मा गांधी और आचार्य विनोबा भावे से प्रभावित होकर इस गांव ने स्वदेशी और खादी को अपनाया था। गांव में आज भी कई बुजुर्ग केवल खादी ही पहनते हैं।
आजादी के पूर्व से लेकर आज तक इस गांव में प्रतिदिन शाम को सर्वधर्म प्रार्थना होती है और गांधी के विचारों को आत्मसात किया जाता है। इस गांव में खादी पहनने वालों की संख्या जरूर अब कम होती जा रही है, लेकिन महात्मा गांधी के आदर्श आज भी इस गांव में जीवित है।
महात्मा गांधी से प्रभावित होकर अपनाई खादी और स्वदेशी वस्तुएं
रूपाखेड़ा गांव की पहचान यहां की उन्नत खेती, स्वच्छता और हरियाली के लिए पूरे जिले में होती है, लेकिन इस गांव के गांधीवादी बुजुर्गों के खादी और स्वदेशी प्रेम के लिए भी रूपाखेड़ा को पूरे प्रदेश में जाना पहचाना जाता है। गांव के रिटायर्ड प्रोफेसर प्रकाश चंद्र पाटीदार ने बताया कि आजादी के पहले महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन से हमारे पूर्वज जुड़े थे और उन्होंने खादी पहनने का संकल्प लिया था। जिसके बाद आचार्य विनोबा भावे द्वारा भी महात्मा गांधी के सर्वोदय विचार को आगे बढ़ाया. जिसमें खादी पहनने और स्वदेशी अपनाने का संकल्प पूरे गांव के लोगों ने लिया था।
नशे एवं अपराध से मुक्त है गांव
गांव के अशोक पाटीदार अपनी पीढ़ी में एकमात्र खादी के कपड़े पहनने वाले व्यक्ति हैं। अशोक पाटीदार ने बताया कि युवा पीढ़ी अब खादी नहीं पहनती है, लेकिन महात्मा गांधी के आदर्श और सिद्धांत आज भी गांव के लोगों ने अपनाए हुए हैं। गांव पूर्ण रूप से नशे से मुक्त है। अपराध के मामले में भी इस गांव का संबंधित पुलिस थाने में कोई रिकॉर्ड नहीं है। छोटे-मोटे विवाद गांव की चौपाल पर बैठकर वरिष्ठ जनों की उपस्थिति में ही सुलझा लिए जाते हैं।
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स्वच्छता और हरियाली से आदर्श बना रूपाखेड़ा
रिटायर्ड प्रोफेसर प्रकाश चंद्र पाटीदार ने बताया कि “भले ही अब इस गांव में खादी पहनने वालों की संख्या कम हो गई हो, लेकिन महात्मा गांधी के विचार और शिक्षा इस गांव में आज भी जीवित है. इस गांव के लोग स्वच्छता को लेकर शुरूआत से ही जागरुक है. यहां के लोग घर के बाहर और सड़क पर साफ सफाई प्रतिदिन करते हैं. वहीं, हर घर के बाहर एक नीम का पेड़ लगाना अनिवार्य है. यही नहीं अपने-अपने खेतों पर भी किसानों ने छायादार और फलों के वृक्ष लगाए हुए हैं. जिसकी वजह से रूपाखेड़ा को स्वच्छता और हरियाली के लिए जाना और पहचाना जाता है.
बहरहाल, आधुनिकता के इस दौर में रतलाम का रूपाखेड़ा गांव न सिर्फ उन्नत खेती के लिए जाना और पहचाना जाता है, बल्कि महात्मा गांधी के आदर्श और खादी वाले गांव के नाम से भी प्रसिद्ध हो रहा है।

