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गाजियाबाद पुलिस का ऑपरेशन मिलाप, 700 किमी दूर नेपाल बॉर्डर से ढूंढ निकाला मासूम

गाजियाबाद। कहते हैं कि जब उम्मीदें टूटने लगें और रास्ते धुंधले हो जाएं, तब जो हाथ थाम ले वही असली नायक होता है। गाजियाबाद की मुरादनगर पुलिस ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। करीब डेढ़ महीने से लापता एक मासूम, जिसकी तलाश में परिवार अपनी आंखें पथरा चुका था, उसे पुलिस ने 700 किलोमीटर दूर नेपाल बॉर्डर के पास से सकुशल बरामद कर लिया है।
स्कूल के लिए निकला था मासूम, फिर नहीं लौटा
मामला मुरादनगर की ईदगाह बस्ती का है। यहां के निवासी शेरुद्दीन का पुत्र रिहान (बदला हुआ नाम) बीती 29 नवंबर की सुबह स्कूल के लिए घर से निकला था, लेकिन शाम तक वापस नहीं लौटा। परिजनों ने उसे हर संभावित जगह ढूंढा, रिश्तेदारों से संपर्क किया और गलियों में पोस्टर तक चिपकाए, लेकिन रिहान का कोई सुराग नहीं मिला। थक-हारकर परिजनों ने मुरादनगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
टेक्निकल सर्विलांस और पुलिस की अथक मेहनत
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसीपी मसूरी लिपि नगायच और थाना प्रभारी अंकित कुमार के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई। चामुंडा चौकी प्रभारी योगेश सिरोही के नेतृत्व में टीम ने जांच शुरू की। पुलिस के पास कोई पुख्ता सुराग नहीं था, लेकिन टीम ने हार नहीं मानी। तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय मुखबिरों की मदद से कड़ियां जोड़ी गईं। करीब 45 दिनों की मशक्कत के बाद पुलिस को रिहान की लोकेशन 700 किलोमीटर दूर नेपाल सीमा के पास कन्नौर में मिली।
700 किमी दूर से सुरक्षित बरामदगी
लोकेशन मिलते ही मुरादनगर पुलिस की टीम तुरंत रवाना हुई और वहां से रिहान को सुरक्षित बरामद कर लिया। पूछताछ में पता चला कि बच्चा किसी बात से नाराज होकर घर से निकल गया था और भटकते हुए इतनी दूर पहुंच गया था। अनजान जगह और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित बचा लिया।
जब थाने में मिलन हुआ तो थम गईं सबकी सांसें
जब पुलिस टीम रिहान को लेकर थाने पहुंची, तो वहां का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। अपने बेटे को जिंदा और सुरक्षित सामने देखकर पिता शेरुद्दीन की आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। उन्होंने पुलिसकर्मियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, ‘पुलिस ने हमारे बच्चे को हमें लौटा दिया है। भगवान के बाद अगर कोई रक्षक है, तो ये पुलिस वाले ही हैं। हमारे लिए ये फरिश्ते बनकर आए।

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