ग्वालियर। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। ग्वालियर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने चंबल क्षेत्र की विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त कर दिया है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता रामनिवास रावत को इस सीट से निर्वाचित विधायक घोषित कर दिया। यह निर्णय रावत द्वारा दायर चुनाव याचिका पर आया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मल्होत्रा ने नामांकन के दौरान अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी हलफनामे में नहीं दी थी।
हलफनामे में छिपाई गई जानकारी बनी कारण
बता दें अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि मुकेश मल्होत्रा ने अपने चुनावी हलफनामे में कम से कम चार आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी नहीं दी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एम.पी.एस. रघुवंशी ने दलील दी कि- सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार के लिए अपने आपराधिक रिकॉर्ड की पूरी जानकारी देना अनिवार्य है। अदालत ने माना कि इस नियम का पालन नहीं किया गया और जानकारी जानबूझकर छिपाई गई। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने मल्होत्रा का चुनाव रद्द करते हुए उपचुनाव में दूसरे स्थान पर रहे रामनिवास रावत को विजेता घोषित कर दिया। हालांकि अदालत ने मल्होत्रा को फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने के लिए एक सप्ताह का समय भी दिया है और संभावित अंतरिम राहत पर भी विचार की गुंजाइश रखी है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मुकेश मल्होत्रा कानून के स्नातक हैं और सामाजिक विज्ञान में भी स्नातकोत्तर हैं, इसलिए उन्हें यह अच्छी तरह पता होना चाहिए था कि लंबित मामलों और आरोप तय होने जैसी जानकारी हलफनामे में देना कितना जरूरी है। इसके बावजूद उन्होंने हलफनामे में लिखा कि मामलों में आरोप तय नहीं हुए हैं, जबकि अदालतों में पहले ही आरोप तय किए जा चुके थे। अदालत ने इसे जानबूझकर दिया गया गलत विवरण माना।
साथ ही न्यायालय ने यह भी पाया कि एक मामले में आरोपों की प्रकृति को हल्का करके पेश किया गया था। हलफनामे में घटना को केवल मौखिक कहासुनी बताया गया था, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार मामला तीन लोगों पर हमला और गाली-गलौज का था, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल थीं। अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि समाज में नकारात्मक प्रतिक्रिया से बचने के लिए आरोपों की गंभीरता को कम करके दिखाया गया।
रामनिवास रावत का सियासी सफर
जानकारी के मुताबिक, भाजपा नेता रामनिवास रावत चंबल क्षेत्र के वरिष्ठ ओबीसी नेता माने जाते हैं और अब तक छह बार विधायक रह चुके हैं। हाल ही में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। भाजपा में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव के मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान उन्हें मंत्री पद की शपथ भी दिलाई गई थी। उस समय एक दिलचस्प घटना भी हुई थी जब उन्होंने करीब आधे घंटे के भीतर दो बार शपथ ली थी—पहले राज्य मंत्री के रूप में और फिर कैबिनेट मंत्री के रूप में। बाद में उन्होंने मजाक में कहा था कि शपथ के दौरान एक शब्द छूट जाने की वजह से उन्हें दोबारा शपथ लेनी पड़ी।
मल्होत्रा का राजनीतिक सफर
वहीं मुकेश मल्होत्रा का राजनीतिक सफर भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वे पहले भाजपा में रह चुके हैं और सहारिया विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी रहे। 2023 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और करीब 44 हजार वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे थे। बाद में राजनीतिक समीकरण बदले और वे कांग्रेस में शामिल होकर विजयपुर उपचुनाव जीतने में सफल रहे। लेकिन अब हाईकोर्ट के फैसले ने उनकी जीत को रद्द कर दिया है।
विधानसभा का बदलता गणित
मध्यप्रदेश विधानसभा की कुल 230 सीटों में फिलहाल भाजपा के 164 विधायक, कांग्रेस के 65 विधायक और भारत आदिवासी पार्टी का एक विधायक है। यदि हाईकोर्ट का फैसला अंतिम रूप से लागू होता है, तो विजयपुर सीट भाजपा के खाते में चली जाएगी और सत्तारूढ़ दल की संख्या और मजबूत हो सकती है। हालांकि अंतिम स्थिति इस फैसले पर संभावित अपील के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल इतना तय है कि चंबल की यह सीट, जो उपचुनाव में कांग्रेस के खाते में गई थी, अब अदालत के फैसले से भाजपा के पक्ष में चली गई है। अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि विधायक बनने के बाद रामनिवास रावत को दोबारा मंत्री पद मिलता है या नहीं, इस पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं।


