नई दिल्ली: हॉकी इंडिया लीग (HIL) को मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली लीग बनाने की दिशा में खेल मंत्रालय ने तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने लीग की वित्तीय स्थिति, फ्रेंचाइजियों की भागीदारी और भविष्य के मॉडल को लेकर हॉकी इंडिया के अधिकारियों तथा फ्रेंचाइजी प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इसके बाद HIL के लिए नया रोडमैप तैयार करने को पांच सदस्यीय समिति बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
लीग को सात साल के लंबे अंतराल के बाद दोबारा शुरू किया गया था, लेकिन इसके बाद Financial Stability और Franchise Participation को लेकर सवाल खड़े हुए। अब मंत्रालय चाहता है कि HIL को आगे बढ़ाने से पहले ऐसा मॉडल तैयार किया जाए, जिससे लीग को बार-बार वित्तीय परेशानियों का सामना न करना पड़े।
5 सदस्यीय कमेटी तैयार करेगी HIL का रोडमैप
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक खेल मंत्री को बैठक में HIL से जुड़ी प्रमुख समस्याओं की जानकारी दी गई। इसके बाद उन्होंने हॉकी इंडिया को लीग की Financial Viability और Stability सुनिश्चित करने के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए।
प्रस्तावित पांच सदस्यीय समिति में हॉकी इंडिया के दो प्रतिनिधि, फ्रेंचाइजियों के दो प्रतिनिधि और खेल मंत्रालय का एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल होगा।
Governance और Financial Model पर फोकस
कमेटी को केवल लीग की वापसी की योजना नहीं बनानी है, बल्कि उसके पूरे ढांचे की समीक्षा भी करनी होगी। इसमें Governance Model, Financial Model और League Structure प्रमुख मुद्दे होंगे।
समिति को तय समय के भीतर अपनी रिपोर्ट खेल मंत्रालय को सौंपने के लिए कहा गया है। इसके आधार पर HIL के अगले चरण को लेकर आगे का फैसला लिया जा सकता है।
फ्रेंचाइजियों के प्रतिनिधि बैठक में शामिल
करीब एक घंटे तक चली बैठक में HIL से जुड़ी कई फ्रेंचाइजियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें हैदराबाद तूफान, वेदांता कलिंगा लांसर्स, JSW सूरमा हॉकी क्लब, शाची बंगाल टाइगर्स, ALP पाइपर्स, JK सीमेंट्स और नई बेंगलुरु फ्रेंचाइजी से जुड़े प्रतिनिधि शामिल थे।
बैठक में खेल सचिव और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के महानिदेशक हरि रंजन राव, TOPS के CEO एनएस जोहल और खेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
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7 साल बाद हुई थी HIL की वापसी
Hockey India League की लंबे अंतराल के बाद वापसी हुई थी। लीग से भारतीय हॉकी खिलाड़ियों को बड़े मंच पर खेलने का मौका मिलने के साथ विदेशी खिलाड़ियों के साथ अनुभव साझा करने का अवसर भी मिलता है।
हालांकि वापसी के बाद वित्तीय स्थिरता और फ्रेंचाइजियों की भागीदारी बड़ी चुनौती बनकर सामने आई। अब खेल मंत्रालय, हॉकी इंडिया और फ्रेंचाइजियों को साथ लाकर इसका स्थायी समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।

