इंदौर से चला नेटवर्क, कई राज्यों के नेताओं-अफसरों के वीडियो मिलने का दावा
इंदौर। इंदौर एक बार फिर चर्चित हनी ट्रैप मामले को लेकर सुर्खियों में है। वर्ष 2019 के हाईप्रोफाइल हनी ट्रैप कांड के बाद सामने आए नए मामले ने राजनीतिक, प्रशासनिक और कारोबारी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह नेटवर्क मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और दिल्ली तक सक्रिय था तथा प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाकर ब्लैकमेलिंग और वसूली का खेल चलाया जा रहा था।
मामले में गिरफ्तार श्वेता विजय जैन, रेशू चौधरी और अलका दीक्षित से पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस को रेशू चौधरी के मोबाइल और अन्य डिजिटल डिवाइस से 100 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं। इनमें नेताओं, अफसरों और कारोबारियों के वीडियो होने की बात कही जा रही है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन वीडियो के जरिए करोड़ों रुपए की उगाही की गई और कुछ वीडियो बेचने की तैयारी भी थी।
पुलिस जांच में सामने आया है कि पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार, भोपाल से श्वेता विजय जैन पूरे सिंडिकेट का संचालन करती थी, जबकि रेशू चौधरी संपर्क साधने और टारगेट तय करने का काम करती थी। इसके बाद ब्लैकमेलिंग और सौदेबाजी की रणनीति बनाई जाती थी।
जांच के दायरे में मध्य प्रदेश के एक विधायक, मालवा-निमाड़ क्षेत्र के कुछ नेता, एक पूर्व अधिकारी, छत्तीसगढ़ के डीआईजी रैंक के अधिकारी, दिल्ली के एक वरिष्ठ नेता और गुजरात के एक उद्योगपति के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि दिल्ली के एक नेता से करीब 4 करोड़ रुपए वसूलने की साजिश रची गई थी।
मामले का खुलासा इंदौर के कारोबारी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर की शिकायत के बाद हुआ। शिकायत के अनुसार, 28 अप्रैल 2026 को सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में अलका दीक्षित और उसके साथियों ने चिंटू ठाकुर के साथ मारपीट की और आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने की धमकी दी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि शिकायतकर्ता चिंटू ठाकुर पर हत्या के प्रयास सहित कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि उसका भाई हेमू ठाकुर पहले राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत आरोपी रह चुका है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को कथित प्रशासनिक संरक्षण मिलने के पहलू की भी जांच कर रही है।
जांच में अब तक क्या-क्या सामने आया?
- 100 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो बरामद।
- कई राज्यों तक फैला नेटवर्क।
- नेताओं, अफसरों और कारोबारियों को बनाया गया निशाना।
- करोड़ों रुपए की ब्लैकमेलिंग का दावा।
- वीडियो बेचने और राजनीतिक दबाव बनाने की भी तैयारी थी।
मामले में अब तक कौन-कौन गिरफ्तार
मामले पर श्वेता विजय जैन, रेशू चौधरी, अलका दीक्षित, जयदीप, लाखन चौधरी, जितेंद्र पुरोहित (कथित पत्रकार) और विनोद शर्मा की गिरफ्तार हो चुकी है।

