Thursday, November 5, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsजन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र में अस्पतालों की लापरवाही, नगर निगम के चक्कर काट...

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र में अस्पतालों की लापरवाही, नगर निगम के चक्कर काट रहे लोग

भोपाल: बच्चे का स्कूल में एडमिशन हो या किसी की मौत के बाद बीमा क्लेम और बैंक खाते से जुड़े काम, हर जगह जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र सबसे जरूरी दस्तावेज है। लेकिन अस्पतालों की छोटी सी लापरवाही इस जरूरी कागज को ही लोगों के लिए मुसीबत बना रही है।

कहीं रिकॉर्ड समय पर दर्ज नहीं हो रहे हैं, तो कहीं गलत नाम, तारीख और जानकारी ऑनलाइन फीड कर दी जा रही है। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल नगर निगम ने सख्ती दिखाई है और लापरवाही बरतने वाले 75 निजी अस्पतालों पर सवा लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

गलत जानकारी से अटक रहे एडमिशन और बीमा क्लेम

जन्म प्रमाण पत्र में बच्चे का नाम, जन्मतिथि या माता-पिता के नाम में गलती होने पर परिजनों को अस्पताल से लेकर नगर निगम के पंजीयन कार्यालय तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई बार सुधार न होने से स्कूल में प्रवेश तक अटक जाता है।

वहीं मृत्यु प्रमाण पत्र में गलती या देरी होने पर परेशानी और बढ़ जाती है। बीमा क्लेम, बैंक खातों के निपटारे और संपत्ति के नामांतरण जैसे कामों में सही प्रमाण पत्र जरूरी होता है। रिकॉर्ड की एक छोटी सी चूक भी परिवारों के लिए महीनों की भागदौड़ बन जाती है।

21 दिन में रिकॉर्ड दर्ज करना जरूरी

नगर निगम भोपाल की जन्म-मृत्यु शाखा के प्रभारी रजिस्ट्रार सत्यप्रकाश बड़गैया ने बताया कि नियम के अनुसार जन्म और मृत्यु का पंजीयन 21 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य है। अस्पतालों की जिम्मेदारी है कि वे जानकारी की सही तरीके से जांच कर समय पर ऑनलाइन रिकॉर्ड दर्ज करें। लेकिन कई निजी अस्पताल नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले 75 निजी अस्पतालों पर कुल सवा लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है और भविष्य में लापरवाही न बरतने की सख्त हिदायत दी गई है।

यह भी पढ़ें: देवास शराब कांड पर विश्वास सारंग का कांग्रेस पर हमला, जीतू पटवारी से पूछे सवाल?

क्या है समाधान?

विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था का मकसद प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाना है, लेकिन इसका फायदा तभी मिलेगा जब अस्पताल स्तर पर ही डेटा सही दर्ज हो। सिर्फ जुर्माना लगाने से स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। इसके लिए अस्पतालों में रिकॉर्ड दर्ज करने वाले कर्मचारियों को नियमित ट्रेनिंग देना और उनकी जवाबदेही तय करना जरूरी है।

साथ ही नगर निगम को भी ऑनलाइन रिकॉर्ड की नियमित समीक्षा करनी चाहिए ताकि गलत प्रविष्टियों और लंबित मामलों को समय रहते पकड़ा जा सके।

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

1 to 7 November 2026
25 to 31 October 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन