भोपाल: राजधानी में गणेशोत्सव अब विसर्जन के दौर में पहुंच गया है। डोल ग्यारस के साथ मंगलवार, 22 सितंबर से गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन की शुरुआत होगी। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर बड़े चल समारोह निकलेंगे और विसर्जन का मुख्य दौर रहेगा। शहर में इस बार करीब 1800 स्थानों पर गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इसे देखते हुए नगर निगम ने प्रमुख घाटों पर सुरक्षा, सफाई और यातायात व्यवस्था के साथ प्रतिमाओं के सुरक्षित विसर्जन की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
बड़े घाटों पर क्रेन और पोकलेन की व्यवस्था
नगर निगम ने बड़ी प्रतिमाओं को सुरक्षित तरीके से पानी में उतारने के लिए प्रमुख विसर्जन घाटों पर क्रेन और पोकलेन मशीनें लगाने की तैयारी की है। प्रेमपुरा, कमलापति और खटलापुरा घाट पर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। इन स्थानों पर 24 घंटे गोताखोर तैनात रहेंगे। किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए अग्निशमन दल की व्यवस्था भी रहेगी।
महापौर मालती राय ने प्रेमपुरा, कमलापति और खटलापुरा घाट का निरीक्षण किया। उन्होंने सफाई, रोशनी, सुरक्षा, सीढ़ियों की मरम्मत और विसर्जन मार्गों की व्यवस्था समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
छोटी प्रतिमाओं के लिए बनाए जा रहे कुंड
घर और छोटे पंडालों की गणेश प्रतिमाओं के लिए शहर के प्रमुख मार्गों और चौराहों पर अस्थायी विसर्जन कुंड तैयार किए जा रहे हैं। नगर निगम ने लोगों से छोटी प्रतिमाओं को इन कुंडों में विसर्जित करने की अपील की है। निगम के अनुसार, इन कुंडों में नर्मदा और गंगा जल की व्यवस्था भी की जाएगी।
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तीन प्रमुख घाटों पर मुख्य व्यवस्था
बड़े स्तर पर विसर्जन के लिए प्रेमपुरा, कमलापति और खटलापुरा घाट प्रमुख रहेंगे। बैरागढ़ क्षेत्र में भी विसर्जन की व्यवस्था है। इसके अलावा नगर निगम ने नौ स्थानों पर वैकल्पिक विसर्जन स्थल विकसित करने की योजना बनाई थी। इनमें मालीखेड़ी, नीलबड़, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, संजीव नगर, हथाईखेड़ा, पांच नंबर, शाहपुरा, प्रेमपुरा और समरधा शामिल हैं। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार इन नए स्थलों पर इस बार पूरी तरह विसर्जन व्यवस्था तैयार नहीं हो सकी है।

