नई दिल्ली: UPI पेमेंट पर लगने वाले MDR को लेकर कारोबारियों की चिंता अब फैसलों में भी दिखाई देने लगी है। औद्योगिक सामान बेचने वाले ऑनलाइन मार्केटप्लेस Pneucons ने 10 अक्टूबर 2026 से अपने प्लेटफॉर्म पर UPI पेमेंट स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है। कंपनी का कहना है कि उसके कारोबार में मार्जिन काफी कम है और नया MDR लागू होने के बाद UPI के जरिए भुगतान लेना उसके लिए महंगा साबित होगा।
₹10 हजार के ऑर्डर में समझें पूरा गणित
Pneucons के को-फाउंडर प्रितेश लखानी के मुताबिक कंपनी किसी ऑर्डर पर टैक्स से पहले करीब 0.5% कमीशन कमाती है। ऐसे में 0.4% MDR कंपनी की कमाई का बड़ा हिस्सा खत्म कर सकता है। तो यह करीब ₹47.20 होगा। यानी ₹50 की कमाई में से लगभग ₹47 MDR में ही चले जाएंगे। कंपनी के हिसाब से यह उसके मार्जिन का करीब 94% है।
इसके अलावा MDR पर लगने वाला GST भी शुरुआत में कंपनी को देना होगा। हालांकि इसे बाद में Input Tax Credit के रूप में लिया जा सकता है, लेकिन कंपनी का कहना है कि इससे उसके Working Capital पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
15 अक्टूबर से क्या बदलने वाला है?
UPI पेमेंट को लेकर नया नियम सामने आया है। नए नियम के मुताबिक, हर UPI ट्रांजेक्शन पर MDR नहीं लगेगा। ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान पर कोई MDR चार्ज नहीं देना होगा। वहीं, ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा Person-to-Merchant यानी P2M ट्रांजेक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजेक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है। जबकि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांसफर पर पहले की तरह कोई MDR नहीं लगेगा।
ईंधन, रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और कृषि इनपुट जैसे कुछ जरूरी और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर फ्लैट ₹5 MDR का प्रावधान रखा गया है।
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ग्राहक नहीं, मर्चेंट उठाएगा खर्च
सबसे जरूरी बात यह है कि MDR सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाना है। यानी कोई ग्राहक ₹10,000 का UPI भुगतान करता है तो उससे अलग से 0.4% MDR नहीं लिया जाना चाहिए। इसका खर्च मर्चेंट को उठाना होगा।
Pneucons का फैसला इसलिए चर्चा में है क्योंकि यह दिखाता है कि कम मार्जिन वाले कारोबार पर छोटा दिखने वाला MDR भी बड़ा असर डाल सकता है। फिलहाल दूसरी बड़ी कंपनियों की ओर से UPI बंद करने जैसा फैसला सामने नहीं आया है, लेकिन कारोबारियों के बीच MDR को लेकर चिंता बढ़ रही है।

