वाशिंगटन। भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान करोड़ों नाम हटाए जाने का मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में है। भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमीला जयपाल ने मतदाता सूची से करीब 13.36 करोड़ नाम हटाए जाने के आंकड़ों पर चिंता जताई है। उन्होंने भारत में लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित करने वाले कथित कदमों के विरोध में हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का समर्थन किया है।
वॉशिंगटन राज्य से डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद जयपाल ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारत में हो रहे घटनाक्रम अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन पर मतदान के अधिकारों को कमजोर करने के लगाए जा रहे आरोपों से मिलते-जुलते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लोकतंत्र की रक्षा करना जरूरी है और भारत तथा अमेरिका के नागरिकों को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव का अधिकार मिलना चाहिए।
जयपाल ने भारत में लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर आवाज उठाने वाले लोगों के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने शांतिपूर्ण और अहिंसक आंदोलनों को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।
एसआईआर के आंकड़ों में कितने नाम हटे?
भारत निर्वाचन आयोग के साझा आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर के पहले और दूसरे चरण में 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा मतदाता सूचियों से करीब 7.2 करोड़ नाम हटाए गए। तीसरे चरण में 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा सूचियां प्रकाशित होने के बाद हटाए गए नामों की संख्या 6.16 करोड़ बताई गई।
इन आंकड़ों को जोड़ने पर तीनों चरणों में कुल करीब 13.36 करोड़ नाम हटाए जाने की बात सामने आती है। हालांकि, नाम हटने के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इनमें मृत मतदाता, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए लोग, दोहरी प्रविष्टियां और अन्य कारण शामिल हो सकते हैं। इसलिए केवल कुल आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि हटाए गए सभी नाम पात्र मतदाताओं के थे या उन्हें गलत तरीके से सूची से बाहर किया गया।
नाम छूटने पर क्या है विकल्प?
निर्वाचन आयोग के अनुसार, एसआईआर के दौरान यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से छूट जाता है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम शामिल कराने के लिए दावा प्रस्तुत कर सकता है। इसके अलावा, पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 का उपयोग कर सकते हैं।
मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि चुनाव में मतदान का अधिकार सूची में नाम दर्ज होने पर निर्भर करता है। ऐसे में एसआईआर के दौरान नाम हटाने की प्रक्रिया, उसकी पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं को अपना नाम दोबारा जुड़वाने का अवसर देना अहम मुद्दे हैं।
एसआईआर को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि मतदाता सूची शुद्ध हो और किसी भी पात्र नागरिक को अपने मताधिकार से वंचित न होना पड़े।

