न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र की एक विवादित रिपोर्ट पर भारत ने बेहद कड़ा ऐतराज जताया है। दरअसल, UN की एक रिपोर्ट में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के ‘डी-कंपनी’ गिरोह को भारत में मौजूद एक आपराधिक संगठन बता दिया गया। भारत ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह सरासर गलत और बेबुनियाद है, क्योंकि रिपोर्ट में इसका कोई सबूत ही नहीं दिया गया है।
भारत ने चेतावनी दी
भारत ने साफ चेतावनी दी कि इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना गलतियों से संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्था की साख को भारी नुकसान पहुंचता है।
आपको बता दें कि यह रिपोर्ट जुलाई 2026 में बेन सॉल द्वारा तैयार की गई थी, जिसे हाल ही में UNGA के 81वें सत्र में पेश किया गया। इस रिपोर्ट को बनाने वाले अधिकारी पर चीन से पैसे लेने के भी गंभीर आरोप लग रहे हैं।
बेन साल को आर्थिक मदद को लेकर भी सवाल उठे
बेन सॉल ऑस्ट्रेलिया की सिडनी यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर हैं। उन्हें मिलने वाली आर्थिक मदद को लेकर भी सवाल उठे हैं।
संयुक्त राष्ट्र के कामकाज पर नजर रखने वाले यूएन वॉच ने मई 2026 में एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें आरोप लगाया गया कि चीन की सरकार ने 2024 में सॉल को 1.5 लाख डॉलर दिए थे। रिपोर्ट में चीन को उनका सबसे बड़ा आर्थिक मददगार बताया गया।
ये भी पढ़ें: CM धामी ने लॉन्च किया भाषा AI वॉइस पोर्टल,बोले-उत्तराखंड की बोलियों का AI से होगा संरक्षण
भारत बोला- दाऊद 1993 से वांटेड
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति की बैठक में बुधवार को भारत के प्रतिनिधि रघु पुरी ने यह मुद्दा उठाया।
भारत ने रिपोर्ट के उस हिस्से पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2003 में अल-कायदा से संबंधों के कारण भारत में मौजूद डी-कंपनी के सरगना को अपनी प्रतिबंध सूची में शामिल किया था।
रघु पुरी ने कहा कि डी-कंपनी को भारत में मौजूद संगठन बताने से लोगों के सामने गलत तस्वीर जाती है।
दाऊद इब्राहिम और उसका गिरोह 1993 के मुंबई बम धमाकों से जुड़े मामले में भारत में वांटेड हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में भी दाऊद से जुड़ी जानकारी दी गई है।

