तेहरान। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान से एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने वैश्विक राजनीति में नई सनसनी पैदा कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरानी संसद में एक विवादित और बेहद आक्रामक प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है, जिसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई को कानूनी समर्थन देने की बात कही जा रही है।
बताया जा रहा है कि इस प्रस्तावित कानून के तहत दोनों नेताओं की हत्या करने वाले को भारी अंतरराष्ट्रीय इनाम देने की अवधारणा पर बहस हो रही है। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर अभी आधिकारिक अंतिम मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन इसकी चर्चा ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
खामेनेई की मौत के बाद बदले की राजनीति तेज
बता दें ईरान में यह उग्र माहौल उस हमले के बाद और भड़क गया, जिसमें इसी साल 28 फरवरी को देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी। ईरान समर्थक संगठनों और कट्टरपंथी गुटों ने इस हमले के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है। इसके बाद से तेहरान में लगातार प्रतिशोध की मांग उठ रही है। राजनीतिक गलियारों से लेकर धार्मिक मंचों तक जवाबी कार्रवाई की आवाज तेज हो चुकी है।
संसद में क्या है नया ‘रिवेंज बिल’?
ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति एक ऐसे विधेयक का ड्राफ्ट तैयार कर रही है, जिसे ‘इस्लामिक रिपब्लिक की सैन्य और सुरक्षा प्रतिक्रिया’ नाम दिया गया है। सूत्रों का दावा है कि इस बिल में उन लोगों को आर्थिक और कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान शामिल हो सकता है, जो ईरान के दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई करें। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
अमेरिका और इजरायल में बढ़ी सुरक्षा अलर्ट
इस खबर के सामने आने के बाद अमेरिका और इजरायल की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर बताई जा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान ऐसा कोई कानून आधिकारिक रूप से पारित करता है, तो इससे मध्य पूर्व में संघर्ष और गहरा सकता है।
वैश्विक राजनीति में बढ़ सकती है टकराव की गर्मी
मध्य पूर्व पहले ही युद्ध, प्रतिबंधों और सैन्य संघर्षों से जूझ रहा है। ऐसे में ईरान का यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून, कूटनीति और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों की नजर अब ईरानी संसद में होने वाली अगली बहस और आधिकारिक फैसले पर टिकी हुई है।

