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7 सरकारी स्कूलों में 31.50 लाख के काम में गड़बड़ी

सीहोर:सीहोर विकासखंड के 7 सरकारी हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में विकास और मरम्मत के लिए मिली 31.50 लाख रुपए की राशि के इस्तेमाल में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। मामले में लोक शिक्षण संचालनालय ने तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) दीपा कीर के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की है। दीपा कीर अभी शाजापुर में सहायक संचालक के पद पर तैनात हैं।
आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह ने उन्हें आरोप पत्र जारी कर 15 दिन में लिखित जवाब मांगा है। आदेश में कहा गया है कि तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है।

7 स्कूलों के लिए मिले थे 31.50 लाख

मामला सितंबर 2025 का है। शासकीय परिसंपत्तियों के रखरखाव और मरम्मत योजना के तहत सीहोर विकासखंड के 7 स्कूलों के लिए राशि जारी की गई थी। प्रत्येक स्कूल के लिए 4.50 लाख रुपए के हिसाब से कुल 31.50 लाख रुपए दिए गए थे।आरोप है कि तत्कालीन BEO दीपा कीर ने सरकारी नियमों और निर्देशों का पालन नहीं किया। जांच में सामने आया कि मध्यप्रदेश भंडार क्रय नियम और वित्त विभाग के निर्देशों के बावजूद पारदर्शी निविदा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
आरोप के मुताबिक, अबिर इंफ्रा, एम.एन. सर्विसेज और अविह्नय इंटरप्राइजेस जैसी चुनिंदा फर्मों से एकलकोटेशन लेकर निर्माण और मरम्मत के काम कराए गए।

काम पूरा देखे बिना कर दिया भुगतान

जांच में सामने आया कि संग्रामपुर, पीएम श्री श्यामपुर, गुडभेला, बरखेड़ी, जताखेड़ा, मोगराराम और मुस्करा के स्कूलों में कराए गए काम का मौके पर पूरा सत्यापन नहीं किया गया। इसके बावजूद पूरी राशि का भुगतान कर दिया गया।
जांच समिति ने मौके पर जाकर काम देखा। समिति में जिला शिक्षा केंद्र के सहायक यंत्री, जनपद शिक्षा केंद्र के उपयंत्री, एडीपीसी समग्र शिक्षा, संकुल प्राचार्य और सीनियर शिक्षक शामिल थे।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कई स्कूलों में छत की वॉटरप्रूफिंग, टाइल्स और शेड निर्माण का काम अधूरा या खराब गुणवत्ता का मिला। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ कामों के लिए बाजार कीमत से ज्यादा राशि के बिल लगाए गए और मंजूर कराए गए।

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रिकॉर्ड भी अधूरे मिले

जांच के दौरान भुगतान से जुड़े कई जरूरी दस्तावेज और बिल भी अधरे पाए गए। लोक शिक्षण संचालनालय जांच के दौरान भुगतान से जुड़े कई जरूरी दस्तावेज और बिल भी अधूरे पाए गए। लोक शिक्षण संचालनालय के मुताबिक, पदीय जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही से शासन को आर्थिक नुकसान हुआ।
विभाग ने दीपा कीर के खिलाफ मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 (1), (2) और (3) के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्हें 15 दिन में अपना जवाब देने को कहा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर उपलब्ध रिकॉर्ड और सबूत के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

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