जबलपुर: मध्य प्रदेश में देशी शराब की सप्लाई के टेंडर में कथित मिलीभगत से जुड़े मामले में सात शराब कंपनियों को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। कंपनियों ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की जांच और कार्रवाई को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उनकी याचिकाएं खारिज कर दी हैं, जिससे CCI के लिए मामले में आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की पीठ ने 17 सितंबर 2026 को मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कंपनियों को मिली अंतरिम राहत भी समाप्त कर दी। साथ ही CCI को जांच की प्रक्रिया पूरी कर कानून के अनुसार अंतिम आदेश जारी करने को कहा है। हालांकि, इस स्तर पर कंपनियों के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए हैं और अंतिम निष्कर्ष CCI की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आएगा।
इन सात कंपनियों ने दी थी चुनौती
मामले में मुख्य याचिका एसोसिएटेड अल्कोहॉल्स एंड ब्रुअरीज लिमिटेड की ओर से दायर की गई थी। इसके साथ ग्रेट गैलियन वेंचर्स लिमिटेड, ओएसिस डिस्टिलरीज लिमिटेड, अग्रवाल डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड, बापुना अल्कोब्रू प्राइवेट लिमिटेड, विंध्याचल डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड और डीसीआर डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड की याचिकाओं पर भी सुनवाई हुई।
विवाद मध्य प्रदेश में देशी शराब की सप्लाई के लिए होने वाली टेंडर प्रक्रिया से जुड़ा है। CAG की वित्त वर्ष 2016-17 की रिपोर्ट में वर्ष 2012-13 से 2016-17 के दौरान हुई टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए थे।
रिपोर्ट में कुछ कंपनियों के बार-बार चुनिंदा जिलों में L-1 bidder बनने और बोली की दरों में कम अंतर जैसी स्थितियों का उल्लेख किया गया था। इसके आधार पर कंपनियों के बीच संभावित मिलीभगत और बाजार को जिलों के आधार पर बांटने की आशंका की जांच आगे बढ़ी।
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CCI ने 2020 में शुरू की थी जांच
CCI ने 4 अगस्त 2020 को Competition Act की धारा 26(1) के तहत जांच का आदेश दिया था। इसके बाद मामले की जांच महानिदेशक (DG) को सौंपी गई।जांच के दौरान कंपनियों और संबंधित सरकारी अधिकारियों से जानकारी जुटाई गई। जांच एजेंसी ने डिजिटल उपकरण, ईमेल और अन्य रिकॉर्ड भी एकत्र किए। महानिदेशक ने 31 मार्च 2023 को 1,200 से अधिक पन्नों की जांच रिपोर्ट CCI को सौंपी थी।
अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद CCI मामले में आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकेगा। आयोग के अंतिम आदेश के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जांच में सामने आए आरोपों पर उसका अंतिम निष्कर्ष क्या है।

