नई दिल्ली: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। भारत के कई शहरों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास या इससे ऊपर बिकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कुछ ऐसे देश भी हैं, जहां पेट्रोल की कीमत पानी की एक बोतल से भी कम पड़ सकती है?
वेनेजुएला, ईरान और लीबिया जैसे तेल उत्पादक देशों में ईंधन बेहद कम कीमत पर उपलब्ध होने के लिए जाना जाता है। स्थानीय कीमत, सब्सिडी और करेंसी कन्वर्जन के आधार पर कुछ मामलों में पेट्रोल की कीमत भारतीय रुपये में महज कुछ रुपये प्रति लीटर के बराबर बैठती है।
आखिर इतना सस्ता पेट्रोल कैसे?
इन देशों में पेट्रोल सस्ता होने की सबसे बड़ी वजह बड़े तेल भंडार, घरेलू उत्पादन और सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी है। सरकारें घरेलू ग्राहकों के लिए ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखती हैं।
यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत ज्यादा होने के बावजूद वहां के नागरिकों को पेट्रोल बहुत कम कीमत पर मिल सकता है।
भारत में क्यों महंगा पड़ता है पेट्रोल?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। पेट्रोल की अंतिम कीमत केवल क्रूड ऑयल के रेट से तय नहीं होती। इसमें refining cost, transportation, dealer commission और केंद्र व राज्य सरकारों के टैक्स जैसे कई हिस्से शामिल होते हैं।
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इसी कारण देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल की कीमत में अंतर देखने को मिलता है।
हांगकांग में पेट्रोल बेहद महंगा
एक तरफ कुछ तेल उत्पादक देशों में पेट्रोल बहुत सस्ता है, तो दूसरी तरफ हांगकांग दुनिया के सबसे महंगे पेट्रोल बाजारों में शामिल है। यहां ऊंचे टैक्स और दूसरे शुल्क के कारण वाहन चलाने वालों को पेट्रोल के लिए काफी ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ती है।
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इसके अलावा डेनमार्क, नॉर्वे और आइसलैंड जैसे कई देशों में भी ईंधन पर टैक्स और अन्य शुल्क इसकी कीमत बढ़ा देते हैं।
अमेरिका में लीटर नहीं, गैलन में बिकता है पेट्रोल
अमेरिका में पेट्रोल को आमतौर पर Gasoline कहा जाता है और इसकी कीमत प्रति गैलन बताई जाती है। एक अमेरिकी गैलन करीब 3.785 लीटर के बराबर होता है।

अमेरिका दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन वहां भी पेट्रोल की कीमत हर राज्य में एक जैसी नहीं होती। कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में टैक्स, पर्यावरण से जुड़े नियम और ईंधन की specifications के कारण कीमत राष्ट्रीय औसत से अधिक रह सकती है।
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एक ही क्रूड ऑयल, फिर कीमत में इतना अंतर क्यों?
किसी देश में पेट्रोल कितना महंगा या सस्ता होगा, यह केवल अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमत से तय नहीं होता। इसमें देश का घरेलू तेल उत्पादन, टैक्स, सरकारी सब्सिडी, refining और transportation cost, currency exchange rate और स्थानीय नीतियां भी बड़ी भूमिका निभाती हैं।

यही कारण है कि एक देश में पेट्रोल कुछ रुपये प्रति लीटर के बराबर मिल सकता है, जबकि दूसरे देश में उसी ईंधन के लिए कई गुना ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है।

