नई दिल्ली: देशभर में चीनी की कीमतों में हालिया तेजी के बीच इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने कहा है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। एसोसिएशन के मुताबिक, आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। पिछले एक महीने में चीनी के दाम 20% से ज्यादा बढ़कर करीब 56 से 60 रुपये प्रति किलो पहुंच गए हैं।
जमाखोरी और कम उत्पादन से बढ़े दाम
ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा कि हालिया तेजी की प्रमुख वजह सट्टेबाजी के चलते जमाखोरी और मौसम संबंधी समस्याओं के कारण कम उत्पादन है। उन्होंने कहा कि घरेलू सप्लाई की स्थिति मजबूत है और आगामी त्योहारी सीजन की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
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10 लाख टन रॉ शुगर का ड्यूटी-फ्री आयात
कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी थी। इससे घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
15 अक्टूबर से पहले पहुंच सकती है पहली खेप
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के अध्यक्ष प्रकाश नाईकनवरे ने कहा कि आयातित चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच सकती हैं। उनके मुताबिक, थाईलैंड में भी सप्लाई की स्थिति चुनौतीपूर्ण है, इसलिए ब्राजील से आयात प्रमुख विकल्प है। वहां से भारत पहुंचने में करीब 40 से 45 दिन लग सकते हैं।
तटीय राज्यों को पहले मिलेगी चीनी
महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों में आयातित रॉ शुगर पहले पहुंचने की संभावना है। इसके बाद इसे रेल और सड़क मार्ग से उत्तर भारत के राज्यों तक भेजा जाएगा।
रॉ शुगर को रिफाइन कर बनेगी सफेद चीनी
ब्राजील से आने वाली रॉ शुगर सीधे बाजार में बिक्री के लिए इस्तेमाल नहीं होगी। इसे शुगर मिलों और रिफाइनरियों में प्रोसेस कर सफेद दानेदार चीनी में बदला जाएगा। इसके बाद यह खुदरा बाजार में उपलब्ध होगी।

