किरनापुर। बालाघाट के किरनापुर क्षेत्र में स्पीड ब्रेकर को लेकर अब मामला सिर्फ एक हादसे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह जनआक्रोश और सिस्टम की नाकामी का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। जहां एक ओर परसवाड़ा स्थित आरोग्य धाम अस्पताल के पास बना खतरनाक और नियमविहीन स्पीड ब्रेकर लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है, वहीं दूसरी ओर असली जरूरत वाले स्थान आज भी प्रशासनिक अनदेखी के शिकार हैं।
जानकारी के अनुसार, किरनापुर बस स्टैंड, अस्पताल और अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सड़क पार करते समय लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने कई बार जनप्रतिनिधियों से इन एक्सीडेंट पॉइंट्स पर स्पीड ब्रेकर बनाए जाने की मांग की थी। इस मुद्दे को लेकर जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों से चर्चा कर जल्द कार्य कराने का आश्वासन भी दिया था और उस समय इसे लेकर काफी वाहवाही भी बटोरी गई थी।
लेकिन समय बीतता गया और साल दर साल गुजरते गए, इसके बावजूद उन महत्वपूर्ण स्थानों पर आज तक कोई स्पीड ब्रेकर नहीं बनाया गया। नतीजतन, वे क्षेत्र आज भी दुर्घटना के स्थायी केंद्र बने हुए हैं, जहां आए दिन लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार घटनाएं होने के बावजूद न तो प्रशासन ने गंभीरता दिखाई और न ही जनप्रतिनिधियों ने कोई ठोस पहल की।
इसी बीच सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जहां वास्तव में स्पीड ब्रेकर की जरूरत थी, वहां तो कोई व्यवस्था नहीं की गई, लेकिन गांव के बाहर एक निजी संस्थान के पास बिना किसी स्पष्ट कारण और बिना नियमों के विपरीत स्पीड ब्रेकर बना दिया गया। इस ब्रेकर पर न तो कोई चेतावनी संकेतक लगाए गए हैं और न ही सफेद पट्टी (मार्किंग) की गई है, जिससे यह विशेष रूप से रात के समय दिखाई नहीं देता और सीधे हादसे को न्योता देता है।
हाल ही में इसी खतरनाक ब्रेकर के कारण एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जिससे पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। घटना के बाद पूर्व विधायक रमेश भटेरे ने कड़ा विरोध जताते हुए गोंदिया अस्पताल पहुंचकर घायल महिला और उसके पति से मुलाकात की तथा पूरे मामले को जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर यह ब्रेकर किसके निर्देश पर और किस उद्देश्य से बनाया गया। क्या यह लोक निर्माण विभाग (PWD) की स्वीकृति से बनाया गया है, या फिर किसी निजी व्यक्ति द्वारा मनमाने ढंग से सड़क पर हस्तक्षेप कर दिया गया है? यदि यह विभाग द्वारा बनाया गया है, तो निर्धारित मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया, और यदि नहीं, तो यह सीधा-सीधा अवैध निर्माण का मामला बनता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की आंखों पर मानो पट्टी बंधी हुई है, तभी बार-बार हादसों और शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सही स्थानों पर ब्रेकर बनाए जाते, तो कई हादसों को रोका जा सकता था।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए अब क्षेत्र की जनता ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, गलत तरीके से बनाए गए इस खतरनाक स्पीड ब्रेकर को तत्काल हटाया या मानकों के अनुसार सुधारा जाए, और जहां वास्तव में जरूरत है वहां तत्काल स्पीड ब्रेकर बनाकर लोगों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
पारदर्शिता पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज
यदि बिना उचित जांच और सर्वे के किसी स्थान को ब्लैक स्पॉट घोषित कर स्पीड ब्रेकर बना दिया गया, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि जनता की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि ब्लैक स्पॉट घोषित करने का आधार क्या था। यदि इसमें किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

