बालाघाट: जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में शासकीय योजनाओं में भ्रष्टाचार चरम पर नजर आ रहा है। जहां मूलभूत सुविधाएं प्रदान करवाने वाली सरकारी प्रणाली भी अब शो-पीस बनकर रह गई है। हैरत की बात यह है कि कागजों में विकास चरम पर है और अधिकारी खुद की पीठ थपथपा रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि शासन की जनकल्याणकारी नल-जल योजना कई जगह अभिशाप बनती जा रही है।
नल-जल योजना से जुड़ी एक शिकायत ग्राम कोहका के प्राथमिक स्कूल से सामने आई है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बीआरसी कार्यालय बैहर के अंतर्गत आने वाली कई स्कूलों में नल-जल योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है और सरकार की इस योजना के नाम पर खूब लीपापोती की गई है।
बैहर बीआरसी कार्यालय के अधीन करीब 235 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलें ऐसी हैं, जहां लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा ठेकेदारों के जरिए नल-जल योजना का कार्य कराया गया था। प्रत्येक स्कूल में लगभग 2.50 लाख रुपये की योजना थी। इस योजना के तहत हैंडपंप, पाइपलाइन, पानी टंकी और इलेक्ट्रिक वाटर मोटर लगाकर जल-आपूर्ति प्रदान की जानी थी, ताकि स्कूली छात्र-छात्राओं को शुद्ध पेयजल मिल सके। लेकिन ठेकेदारों ने घटिया स्तर की सामग्री लगाकर ऐसा बंदरबांट किया कि नल-जल योजना दागदार बन गई।
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3 साल पहले शुरू हुई योजना, अब बंद पड़ी है जल-आपूर्ति
प्राथमिक शाला कोहका में लगभग 3 वर्ष पहले नल-जल योजना शुरू की गई थी। शुरुआती एक-दो दिन योजना ठीक चली, लेकिन उसके बाद कई स्कूलों में जल-आपूर्ति सेवा ही बंद हो गई। शिक्षकों द्वारा बार-बार शिकायत की गई, लेकिन तकनीकी खराबी की रिपेयरिंग तक नहीं हो सकी।
अब आवश्यकता है कि जिला कलेक्टर इस योजना की सटीक समीक्षा करें और जहां-जहां खामियां या लापरवाही की शिकायतें मिल रही हैं, उनका जल्द निराकरण कराएं।
हैरत की बात यह भी है कि नल-जल योजना की स्थिति सिर्फ स्कूलों में ही खराब नहीं है, बल्कि गांव-गांव में यह योजना सवालों के कटघरे में है। संबंधित विभाग अब तक गंभीर नहीं है, जबकि निर्धारित समय में कार्य पूर्ण कर हर घर तक योजना का लाभ पहुंचाना है। यदि ऐसी लापरवाही रही तो हर घर जल की कल्पना सालों बाद भी अधूरी ही रहेगी।

