जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी परियोजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली से गिरफ्तारी
जानकारी के मुताबिक, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने लंबे समय से फरार चल रहे अग्रवाल को दिल्ली से हिरासत में लेकर जयपुर लाया। यहां मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। इससे पहले उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट और लुकआउट सर्कुलर जारी किया जा चुका था, जिससे उनकी गिरफ्तारी का रास्ता साफ हुआ।
टेंडर सिस्टम में ‘सिंडिकेट’ की भूमिका
जांच एजेंसियों के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत जारी टेंडरों में एक संगठित नेटवर्क के जरिए हेरफेर किया गया। आरोप है कि कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र और तकनीकी दस्तावेज लगाए गए। हैरानी की बात यह है कि संबंधित अधिकारियों को इन गड़बड़ियों की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
बिना निरीक्षण पास हुईं करोड़ों की परियोजनाएं
बता दें ACB की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली कई परियोजनाओं में अनिवार्य साइट निरीक्षण तक नहीं किया गया। कागजों पर ही काम पूरा दिखाकर भुगतान जारी कर दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
साथ ही ACB ने राजस्थान के कई जिलों के अलावा दिल्ली, बिहार और झारखंड में भी एक साथ छापेमारी की। इन कार्रवाइयों में फर्जी बिलिंग, भुगतान में हेरफेर और दस्तावेजों में छेड़छाड़ के पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं, जिससे पूरे घोटाले की परतें खुलती जा रही हैं।
अब तक 11 गिरफ्तार
इस मामले में अब तक लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के कई अधिकारियों समेत कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, कुछ आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
पूर्व सरकार के कार्यकाल से जुड़ा मामला
सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा मामला राज्य की पिछली सरकार के कार्यकाल से संबंधित है, जब राजस्थान जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में उच्च स्तर पर निर्णय लिए गए थे। आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये का दुरुपयोग किया गया।
क्या है जल जीवन मिशन?
जल जीवन मिशन की शुरुआत वर्ष 2019 में ग्रामीण भारत के हर घर तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी। लेकिन इस महत्वाकांक्षी योजना में सामने आए घोटाले ने इसकी पारदर्शिता और क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

