नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा को दोषी करार देते हुए उन्हें एक वर्ष की नेकचलनी (Probation of Good Conduct) की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इसके लिए एक लाख रुपये का निजी मुचलका (बॉन्ड) भरने का निर्देश भी दिया।
सरकारी कार्य में बाधा और कानून उल्लंघन के आरोप
बता दें मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई थी। अलका लांबा पर सरकारी कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की करने, उनके कार्य में बाधा डालने, कानूनी आदेशों की अवहेलना करने और सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध करने के आरोप लगाए गए थे। इस मामले में उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132, 221, 223(ए) और 285 के तहत मुकदमा चलाया गया था।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने पहले ही अलका लांबा को दोषी ठहरा दिया था। इसके बाद उनकी ओर से अदालत से नेकचलनी के आधार पर रिहाई की मांग की गई। अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए एक वर्ष तक अच्छे आचरण की शर्त पर रिहाई का आदेश पारित किया।
जुलाई 2024 के प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
जानकारी अनुसार, यह मामला जुलाई 2024 में महिला कांग्रेस द्वारा जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन से जुड़ा है। उस समय अलका लांबा के नेतृत्व में महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न होने की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा
अदालत के फैसले के बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि कोर्ट ने दोषसिद्धि बरकरार रखी है, लेकिन साथ ही अलका लांबा को सुधार का अवसर देते हुए जेल भेजने के बजाय प्रोबेशन का लाभ प्रदान किया है।

