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जेब में सिर्फ 27 पैसे और आंखों में बड़े सपने: जावेद अख्तर ने फुटपाथ पर बिताई थीं रातें, 3 दिन रहे भूखे

मुबंई: आज जावेद अख्तर का नाम भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े लेखकों और गीतकारों में लिया जाता है। उनके लिखे गाने और फिल्में दशकों से लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं। लेकिन सफलता के इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं था। एक समय ऐसा भी था जब वह सिर्फ 27 पैसे लेकर मुंबई पहुंचे थे। रहने की जगह नहीं थी और हालात ऐसे बने कि तीन दिनों तक खाना भी नसीब नहीं हुआ।

जावेद अख्तर की पत्नी और अभिनेत्री शबाना आजमी ने उनके संघर्ष के दिनों को याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है। इसमें उन्होंने बताया कि किस तरह सिर्फ सपनों के भरोसे मुंबई आए जावेद अख्तर ने तमाम मुश्किलों के बावजूद हार नहीं मानी।

19 साल की उम्र में पहुंचे थे मुंबई

4 अक्टूबर 1964 को जावेद अख्तर महज 19 साल की उम्र में बॉम्बे सेंट्रल स्टेशन पहुंचे थे। उस समय उनकी जेब में केवल 27 पैसे थे। पैसे भले ही कम थे, लेकिन फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाने का सपना बहुत बड़ा था।

मुंबई पहुंचने के बाद असली संघर्ष शुरू हुआ। न कोई तय ठिकाना था और न ही रोज खाने की व्यवस्था। काम की तलाश में वह अलग-अलग जगहों और स्टूडियो के चक्कर लगाते रहे।

फुटपाथ और रेलवे स्टेशन पर गुजारीं रातें

शबाना आजमी ने बताया कि शुरुआती दिनों में जावेद अख्तर को कई रातें फुटपाथ पर बितानी पड़ीं। कभी रेलवे स्टेशन तो कभी किसी स्टूडियो के परिसर में सोकर रात काटी। हालात इतने मुश्किल थे कि एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्हें लगातार तीन दिनों तक खाना नहीं मिला।

इसके बावजूद उन्होंने मुंबई छोड़कर वापस लौटने के बजाय यहीं रहकर अपनी जगह बनाने का फैसला किया। यही संघर्ष धीरे-धीरे उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी ताकत बन गया।

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फिर सलीम-जावेद की जोड़ी ने बदल दिया हिंदी सिनेमा

आगे चलकर जावेद अख्तर ने सलीम खान के साथ मिलकर सलीम-जावेद की मशहूर लेखक जोड़ी बनाई। दोनों ने हिंदी सिनेमा को ‘जंजीर’, ‘दीवार’, ‘शोले’ और ‘डॉन’ जैसी कई यादगार फिल्मों की कहानियां और संवाद दिए।

बाद में जावेद अख्तर ने गीतकार के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाई। फिल्मों के लिए लिखे उनके कई गीत आज भी लोगों की पसंद बने हुए हैं।

जावेद अख्तर की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि मुंबई पहुंचते समय उनके पास न पैसा था, न रहने का ठिकाना और न सफलता की कोई गारंटी। उनके पास सिर्फ एक सपना था और उसे पूरा करने की जिद। 27 पैसे से शुरू हुआ उनका मुंबई का सफर आखिरकार उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित नामों में शामिल कर गया।

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