पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में 4 साल की मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी और हत्या के बहुचर्चित मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी 65 वर्षीय भीमराव प्रभाकर कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। घटना के महज 59 दिनों के भीतर आए इस फैसले को पीड़िता के परिवार के लिए बड़ी न्यायिक जीत माना जा रहा है। विशेष POCSO अदालत ने अपहरण, दुष्कर्म और हत्या समेत सभी सात आरोपों को पूरी तरह सिद्ध मानते हुए आरोपी को ‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ श्रेणी का अपराधी माना और मृत्युदंड सुनाया।
1 मई को हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात
जानकारी के मुताबिक, मामला पुणे जिले के नसरापुर गांव का है। 1 मई को आरोपी भीमराव कांबले मासूम बच्ची को खाने का सामान और बछड़ा दिखाने का लालच देकर अपने साथ ले गया। इसके बाद उसने मवेशियों के शेड में बच्ची के साथ दरिंदगी की और पहचान छिपाने के लिए उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली दरिंदगी की परतें
बता दें जांच में सामने आया कि आरोपी ने बच्ची के मुंह में मोजा ठूंस दिया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मासूम के शरीर पर 18 गंभीर चोटों के निशान मिले। अभियोजन पक्ष के मुताबिक आरोपी ने करीब 39 मिनट तक बच्ची के साथ अमानवीय अत्याचार किया। मेडिकल रिपोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि मौत सामान्य हादसा नहीं बल्कि बेहद क्रूर हिंसा का परिणाम थी।
अदालत में झूठा साबित हुआ आरोपी का दावा
वहीं सुनवाई के दौरान आरोपी ने दावा किया कि बच्ची खेलते समय गिर गई थी, जिससे उसकी मौत हुई। लेकिन डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल एविडेंस, CCTV फुटेज, पोटेंसी टेस्ट और फॉरेंसिक जांच ने उसके सभी दावों को झूठा साबित कर दिया। विशेष लोक अभियोजक ने अदालत में सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए इसे दुर्लभ से दुर्लभतम अपराध बताया।
जांच के दौरान सामने आए CCTV फुटेज में आरोपी बच्ची को अपने साथ ले जाता दिखाई दिया। इसके अलावा जिन बच्चों ने दोनों को साथ देखा था, उन्होंने पहचान परेड में भी आरोपी की पहचान की। फॉरेंसिक रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष का मामला और मजबूत कर दिया।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, भीमराव कांबले के खिलाफ पहले से महिला और किशोरी के साथ यौन अपराधों समेत कई गंभीर मामले दर्ज थे। अदालत ने इसे भी सजा तय करने के दौरान महत्वपूर्ण माना।
137 पन्नों में दर्ज हुआ फैसला
सूत्रों के मुताबिक, विशेष न्यायाधीश एस.आर. सालुंखे ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 137 पन्नों का विस्तृत फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि मासूम के साथ हुई बर्बरता समाज को झकझोर देने वाली है और ऐसे अपराधों में कठोरतम सजा ही न्याय का उचित माध्यम है।
इस फैसले को देश के सबसे तेज़ी से निपटाए गए जघन्य आपराधिक मामलों में से एक माना जा रहा है। पीड़िता के परिवार ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था।

