भोपाल: मध्यप्रदेश में छोटे और मझोले उद्योगों के लिए औद्योगिक जमीन की कमी दूर करने और निवेश बढ़ाने के लिए सरकार ने तीन बड़े फैसले किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को एमएसएमई के लिए अलग औद्योगिक विकास कंपनी बनाने, निजी निवेशकों को औद्योगिक पार्क विकसित करने पर 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान देने और अगले दो महीने में सभी जिलों में औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया।
मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित कार्यक्रम में सिंगल क्लिक के जरिए 950 एमएसएमई इकाइयों को 490 करोड़ रुपये और 100 से अधिक स्टार्टअप को करीब 1.50 करोड़ रुपये की सहायता राशि भी वितरित की गई।
एमएसएमई के लिए बनेगी अलग कंपनी
मुख्यमंत्री ने एमएसएमई औद्योगिक विकास कंपनी (एमएसएमई-आईडीसी) के गठन की घोषणा की। राज्य सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली यह कंपनी मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) की तर्ज पर काम करेगी, लेकिन इसका फोकस छोटे और मझोले उद्योगों पर रहेगा।
कंपनी औद्योगिक भूमि का चिन्हांकन, अधिग्रहण, आवंटन और प्रबंधन करेगी। इसके साथ ही औद्योगिक पार्क विकसित करने, छोटे भूखंड उपलब्ध कराने और फ्लैटेड फैक्टरी व प्लग-एंड-प्ले जैसी सुविधाएं तैयार करने की जिम्मेदारी संभालेगी। औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास भी इसके दायरे में होगा।
निजी निवेशकों को 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान
सरकार ने औद्योगिक पार्कों के विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने का फैसला किया है। अब निजी निवेशक एमएसएमई इकाइयों के लिए औद्योगिक पार्क बना सकेंगे। इसके लिए सरकार 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान देगी।
इससे छोटे उद्यमियों को उद्योग लगाने के लिए तैयार औद्योगिक स्थान उपलब्ध कराने और निजी निवेश को बढ़ावा देने की योजना है।
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22 जिलों में खत्म हो चुकी है औद्योगिक जमीन
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के करीब 22 जिलों में एमएसएमई इकाइयों के लिए उपलब्ध औद्योगिक भूमि समाप्त हो चुकी है। ऐसे में नए उद्योग लगाने के इच्छुक उद्यमियों के सामने जमीन की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन गई है।
सरकार ने अगले दो महीने में सभी जिलों में एमएसएमई इकाइयों के लिए औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे उद्योग कम पूंजी में अधिक लोगों को रोजगार देने की क्षमता रखते हैं। सरकार की कोशिश है कि युवाओं को अपने जिले में ही उद्योग लगाने और रोजगार पाने के अवसर मिलें।

