Friday, November 6, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsइंदौर पुलिस का बड़ा एक्शन: पॉकेट गवाह मामले में इंस्पेक्टर दिनेश वर्मा...

इंदौर पुलिस का बड़ा एक्शन: पॉकेट गवाह मामले में इंस्पेक्टर दिनेश वर्मा का डिमोशन

इंदौर: खजराना थाने के पूर्व थाना प्रभारी और वर्तमान में राज्य साइबर सेल में पदस्थ निरीक्षक दिनेश वर्मा के खिलाफ विभागीय जांच पूरी होने के बाद पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। पॉकेट गवाह मामले में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने उन्हें निरीक्षक पद से हटाकर उप निरीक्षक (SI) बना दिया है। यह कार्रवाई तीन साल के लिए की गई है।

विभागीय जांच में आरोप पाए गए सही

पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि विभागीय जांच के दौरान दिनेश वर्मा पर लगाए गए कई आरोप सही पाए गए। कार्रवाई के बाद उनका पद उनके बैच के अन्य अधिकारियों से काफी पीछे हो गया है। उनके साथ भर्ती हुए कई अधिकारी वर्तमान में डीएसपी पद तक पहुंच चुके हैं।

ये भी पढ़े

CM मोहन यादव का छात्राओं से संवाद: बोले- आज का विद्यार्थी ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत

एक ही व्यक्ति को सैकड़ों मामलों में बनाया गया गवाह

जांच में सामने आया कि दिनेश वर्मा जब 31 अगस्त 2020 से 2 अगस्त 2023 तक खजराना थाने के प्रभारी थे, उस दौरान दर्ज कई मामलों में एक ही लोगों को बार-बार गवाह बनाया गया। जांच के मुताबिक, इरशाद पुत्र अब्दुल हकीम को करीब 742 मामलों में और नवीन पुत्र रामचंद्र चौहान को करीब 504 मामलों में गवाह बनाया गया।

गंभीर अपराधों में भी उन्हीं गवाहों का इस्तेमाल

विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2022 और 2023 के दौरान हत्या, धोखाधड़ी, जानलेवा हमला, कूटरचना, छेड़छाड़, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट, आबकारी एक्ट और एनडीपीएस एक्ट जैसे गंभीर मामलों में भी इन्हीं दोनों व्यक्तियों को गवाह बनाया गया। जांच में करीब 333 प्रकरणों में दोनों के नाम गवाह के रूप में दर्ज पाए गए। इसके अलावा 742 जब्ती पत्रकों पर भी उनके हस्ताक्षर मिले, जिससे जांच अधिकारियों ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

फर्जी हस्ताक्षर के मामले का भी उल्लेख

जांच रिपोर्ट में एक मामले का विशेष रूप से जिक्र किया गया है। अपराध क्रमांक 324 में विवेचक द्वारा गवाह इरशाद और गणेश ठाकुर के फर्जी हस्ताक्षर किए जाने की बात सामने आई। पुलिस कमिश्नर के आदेश में कहा गया कि इस तरह की लापरवाही से आरोपियों को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचने की संभावना बनी। मामले की जांच तत्कालीन सीएसपी जयंत राठौर ने की थी, जिसके बाद रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।

आठ पन्नों के आदेश में जिम्मेदारी पर उठे सवाल

पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने अपने आठ पन्नों के आदेश में दिनेश वर्मा के कार्यों पर गंभीर टिप्पणी की है। आदेश में कहा गया कि उन्होंने अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन नहीं किया। आदेश में पुलिस रेगुलेशन के पैरा 64(2) और 64(3) के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। साथ ही पैरा 582 का हवाला देते हुए कहा गया कि थाना प्रभारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के काम के लिए भी जिम्मेदार होता है।

इंदौर पुलिस में लगातार हो रही अनुशासनात्मक कार्रवाई

पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के कार्यकाल में विभागीय अनुशासन को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इससे पहले विजय नगर थाने के तत्कालीन टीआई रवींद्र सिंह गुर्जर और निरीक्षक अजय वर्मा को भी डिमोशन कर एसआई बनाया जा चुका है। वहीं, खजराना थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक (कार्यवाहक) कमल सिंह गुर्जवार को शिकायत लंबित रखने के मामले में डिमोशन कर आरक्षक बनाया गया था।

पुलिस विभाग का कहना है कि लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि विभागीय व्यवस्था और जवाबदेही को मजबूत किया जा सके।

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

1 to 7 November 2026
25 to 31 October 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन