नई दिल्ली: लगातार बढ़ती महंगाई के बीच कॉफी बाजार की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है सर्दियों की शुरुआत से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉफी की कीमतों में 8.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। जहां रोजमर्रा की कई चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, वहीं कॉफी की कीमतों में कमी आई है। इसकी सबसे बड़ी वजह दुनिया में कॉफी का उत्पादन और सप्लाई बढ़ना बताया जा रहा है।
इंटरनेशनल कॉफी ऑर्गनाइजेशन (ICO) की मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में कॉफी की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमत 262.18 सेंट प्रति पाउंड रही, जबकि अगस्त में यह 287.29 सेंट प्रति पाउंड थी। इस तरह एक महीने में कीमतों में 8.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
ब्राजील में रिकॉर्ड उत्पादन से गिरे दाम
दुनिया के सबसे बड़े कॉफी उत्पादक देशों में शामिल ब्राजील में इस साल कॉफी की अच्छी पैदावार हुई है। अगस्त तक वहां करीब 97 प्रतिशत फसल की कटाई पूरी हो चुकी थी।
ब्राजील की नेशनल सप्लाई कंपनी CONAB ने 24 सितंबर को वर्ष 2026 के लिए कॉफी उत्पादन का अनुमान बढ़ाकर रिकॉर्ड 6.76 करोड़ बैग कर दिया। उत्पादन बढ़ने और बाजार में पर्याप्त स्टॉक होने से अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव पड़ा है।
अच्छी क्वालिटी की कॉफी अब भी महंगी
ब्राजील में फसल की कटाई के दौरान हुई बारिश ने कॉफी बीन्स की गुणवत्ता को प्रभावित किया है। इससे बाजार में सामान्य और प्रीमियम क्वालिटी की कॉफी की उपलब्धता में अंतर देखने को मिल रहा है।
साधारण क्वालिटी की कॉफी का स्टॉक बढ़ने से उसके दाम कम हुए हैं, जबकि अच्छी क्वालिटी की अरेबिका कॉफी की मांग बनी हुई है। यही वजह है कि औसत कीमतें गिरने के बावजूद प्रीमियम कॉफी के दाम में उतनी राहत नहीं मिली है।
किस कॉफी के दाम कितने गिरे?
सितंबर में कॉफी की सभी चार प्रमुख श्रेणियों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
- कोलंबियन माइल्ड्स: 8.1 प्रतिशत गिरकर 356.15 सेंट प्रति पाउंड।
- अन्य माइल्ड्स: 8.8 प्रतिशत गिरकर 329.44 सेंट प्रति पाउंड।
- ब्राजीलियन नैचुरल्स: 9.9 प्रतिशत गिरकर 290.19 सेंट प्रति पाउंड।
- रोबस्टा कॉफी: 7.3 प्रतिशत गिरकर 167.49 सेंट प्रति पाउंड।
इनमें सबसे ज्यादा गिरावट ब्राजीलियन नैचुरल्स की कीमतों में दर्ज की गई। वहीं भारत की प्रमुख अरेबिका कॉफी अन्य माइल्ड्स श्रेणी में आती है, जिसकी कीमत भी सितंबर में कम हुई है।
यह भी पढ़ें: यूपीआई पर चार्ज लगाने का फैसला टला, दिवाली तक व्यापारियों को राहत
क्या भारत में भी सस्ती मिलेगी कॉफी?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम होने से भारतीय कॉफी बाजार को भी फायदा मिल सकता है। हालांकि इसका असर दुकानों में मिलने वाली पैकेटबंद कॉफी और कैफे की कीमतों पर तुरंत दिखाई देना जरूरी नहीं है।
भारत में कॉफी की खुदरा कीमतें उत्पादन लागत, पैकेजिंग, परिवहन और कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर भी निर्भर करती हैं। ऐसे में आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार की गिरावट का कितना फायदा ग्राहकों को मिलेगा, यह देखना होगा।

