मालदा। पश्चिम बंगाल के मालदा जिलेमें नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने सोमवार को बड़ा ऑपरेशन चलाते हुए 15 लोगों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि इन लोगों ने चुनावी प्रक्रिया के दौरान सड़क जाम की, सरकारी काम में बाधा डाली और ड्यूटी पर तैनात न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक रोककर रखा।
यह कार्रवाई उस मामले में हुई है, जिसने पिछले महीने पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी थी। मामला स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान हुई घटनाओं से जुड़ा बताया जा रहा है।
चुनावी पुनरीक्षण अभियान के दौरान हुआ था हंगामा
सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम चल रहा था। इसी दौरान कुछ इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने कई जगह रोड ब्लॉक कर प्रशासनिक टीमों और न्यायिक अधिकारियों की आवाजाही रोक दी। NIA की शुरुआती जांच में सामने आया है कि विरोध अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे संगठित तैयारी होने की आशंका जताई जा रही है।
पहले मामले में NIA ने 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें मुख्य आरोपी जोशीम शेख और असमाउल शेख बताए जा रहे हैं। एजेंसी के अनुसार, इन आरोपियों ने हैबतटोला और अमलीटोला के बीच एक महिला न्यायिक अधिकारी का रास्ता रोक लिया था। दावा किया जा रहा है कि अधिकारी करीब 8 घंटे तक मौके पर फंसी रहीं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरी घटना की प्लानिंग किस स्तर पर की गई थी।
तीन और आरोपी गिरफ्तार
दूसरे मामले में मोथाबाड़ी ब्लॉक के बागमारा ब्रिज पर सड़क जाम करने के आरोप में आलमगीर शेख, नुरुल इस्लाम और हबीबुर रहमान को गिरफ्तार किया गया है। NIA का कहना है कि इन लोगों ने जानबूझकर प्रशासनिक व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश की और चुनावी प्रक्रिया प्रभावित करने का प्रयास किया।
सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद तेज हुई जांच
बताया जा रहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद चुनाव आयोग की सिफारिश पर जांच NIA को ट्रांसफर की गई। अब एजेंसी इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क, राजनीतिक साजिश या संगठित समूह तो सक्रिय नहीं था।
कई इलाकों में छापेमारी जारी
NIA और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम लगातार अलग-अलग इलाकों में छापेमारी कर रही है। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

