ग्वालियर: मध्य प्रदेश के डबरा में 17 बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामले में एसटीएफ ने 20 हजार रुपये के इनामी मुख्य आरोपी गुलाबराय गौतम उर्फ सम्यक बोधि भंते को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर जाली दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने, बैंक खाते के जरिए लेन-देन करने और सरकारी कर्मचारियों से संपर्क कराने में मदद करने का आरोप है। एसटीएफ की पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिकों के गिरोह के सरगना रियाल चौधरी उर्फ मित्यानंद भिक्षु के साथ मिलकर काम करने की बात स्वीकार की है। जांच एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पूरे वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है।
नाम सामने आने के बाद हो गया था फरार
एसटीएफ के अधिकारियों के अनुसार, गुलाबराय गौतम मूल रूप से उत्तर प्रदेश के झांसी का निवासी है। वह कुछ समय से ग्वालियर के जनकगंज क्षेत्र स्थित गोल पहाड़िया में रह रहा था। डबरा में 17 बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामले में उसका नाम सामने आने के बाद वह विदिशा जाने की बात कहकर फरार हो गया था।
इसके बाद से एसटीएफ उसकी तलाश में जुटी थी। लगातार खोजबीन के दौरान टीम को उसके छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में होने की जानकारी मिली। इसके आधार पर कार्रवाई करते हुए एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की गिरफ्तारी को मामले की जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उस पर पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में सहयोग करने के साथ ही गिरोह के लिए वित्तीय लेन-देन की व्यवस्था करने का भी आरोप है।
बौद्ध मठों में संपर्क के जरिए हुई मुलाकात
पूछताछ में गुलाबराय ने बताया कि डबरा, विदिशा, भोपाल और बैतूल के बौद्ध मठों में उसकी अच्छी पहुंच थी। विदिशा में बौद्ध धर्म से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान उसकी मुलाकात रियाल चौधरी उर्फ मित्यानंद भिक्षु से हुई थी। एसटीएफ के अनुसार, रियाल चौधरी इस मामले में बांग्लादेशी नागरिकों के गिरोह का कथित सरगना है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों के बीच संपर्क के बाद गुलाबराय ने फर्जी पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में सहयोग किया। हालांकि, इस नेटवर्क में अन्य लोगों की भूमिका और पासपोर्ट तैयार कराने के लिए अपनाए गए तरीकों की विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
10 हजार रुपये महीने के कमीशन पर दिया बैंक खाता
मामले की जांच में बैंक खाते के इस्तेमाल से जुड़ी अहम जानकारी भी सामने आई है। एसटीएफ के मुताबिक, गुलाबराय ने विदिशा के एक बौद्ध मठ में रहने के दौरान भारतीय स्टेट बैंक की स्थानीय शाखा में अपना खाता खुलवाया था। पूछताछ में उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने यह खाता रियाल चौधरी को हर महीने 10 हजार रुपये के कमीशन पर इस्तेमाल करने के लिए दिया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, इसी बैंक खाते के माध्यम से फर्जी पासपोर्ट बनवाने के लिए रकम का लेन-देन किया जाता था। एसटीएफ अब खाते से हुए वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस काम के लिए किन लोगों ने रकम भेजी और उसका इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया।
17 बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट के लिए दी गवाही
एसटीएफ के अनुसार, गुलाबराय ने पूछताछ में स्वीकार किया कि रियाल चौधरी के कहने पर उसने 17 बांग्लादेशी नागरिकों के डबरा के पते पर पासपोर्ट बनवाने के लिए गवाही दी थी। आरोप है कि उसने इन नागरिकों के दस्तावेज तैयार कराने में मदद की और सरकारी तंत्र के कर्मचारियों से संपर्क कराने में भी भूमिका निभाई।
इस मामले में जांच का प्रमुख पहलू यह है कि दूसरे देश के नागरिकों के पासपोर्ट बनवाने के लिए स्थानीय पते और दस्तावेजों का इस्तेमाल कैसे किया गया। एसटीएफ इस बात की भी जांच कर रही है कि पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में किन लोगों ने सहयोग किया और दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान कोई अनियमितता हुई थी या नहीं।
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नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच
गुलाबराय की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ अब फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाले पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच में बैंक खाते के जरिए हुए लेन-देन, कथित सरगना रियाल चौधरी से आरोपी के संपर्क और सरकारी कर्मचारियों की संभावित भूमिका पर ध्यान दिया जा रहा है।
एसटीएफ को उम्मीद है कि आरोपी से पूछताछ के आधार पर मामले में शामिल अन्य सहयोगियों की पहचान करने और फर्जी पासपोर्ट बनवाने की पूरी प्रक्रिया का पता लगाने में मदद मिलेगी। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस मामले में 17 बांग्लादेशी नागरिकों के अलावा अन्य लोगों के दस्तावेजों या पासपोर्ट का इस्तेमाल तो नहीं किया गया।

