लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में 10 मई को बड़ा राजनीतिक दिन साबित हो सकता है। लोकसभा चुनाव से पहले योगी सरकार के संभावित कैबिनेट विस्तार को लेकर राजधानी लखनऊ से लेकर दिल्ली तक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी टीम में 6 नए चेहरों को शामिल कर सकते हैं, जिनमें जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का खास ध्यान रखा गया है। बीजेपी अब मिशन 2027 की रणनीति पर तेजी से काम करती नजर आ रही है।
शाम की बैठक ने बढ़ाई सियासी हलचल
बता दें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से होने वाली मुलाकात के बाद कैबिनेट विस्तार की अटकलें और तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में नए मंत्रियों के नामों पर अंतिम चर्चा हो सकती है। फिलहाल यूपी सरकार में 54 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक सीमा के अनुसार 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं।
इन चेहरों पर लग सकती है मुहर
सूत्रों के मुताबिक, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। इसके अलावा पूजा पाल, मनोज पांडे, कृष्णा पासवान, आशीष सिंह आशु और अशोक कटारिया को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। बीजेपी इस विस्तार के जरिए ओबीसी, दलित और ब्राह्मण वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
चुनावी समीकरण साधने की तैयारी
वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विस्तार सिर्फ मंत्रियों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके जरिए बीजेपी प्रदेश में नया राजनीतिक मैसेज देने की तैयारी में है। पश्चिमी यूपी, बुंदेलखंड और पूर्वांचल के नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हो सकती है।
मिशन 2027 पर बीजेपी का फोकस
बिहार और पश्चिम बंगाल के बाद अब यूपी में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बीजेपी नेतृत्व चाहता है कि चुनावी मोड में जाने से पहले संगठन और सरकार दोनों को नए ऊर्जा के साथ मैदान में उतारा जाए। ऐसे में यह कैबिनेट विस्तार आगामी विधानसभा चुनावों की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

