भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों के 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों के लिए मुख्यमंत्री स्कूटी योजना में इस बार पात्रता के नियम बदल गए हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, शिवाजी नगर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में 7,400 से अधिक विद्यार्थियों के बैंक खातों में योजना की राशि ट्रांसफर करेंगे।
इस बार केवल स्कूल में प्रथम स्थान हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। 2026 से योजना का लाभ लेने के लिए 12वीं की परीक्षा में कम से कम 70 प्रतिशत अंक और अपने स्कूल में प्रथम स्थान हासिल करना अनिवार्य किया गया है।
पहली बार लागू हुई 70% अंक की शर्त
मुख्यमंत्री स्कूटी योजना का लाभ शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूलों के नियमित विद्यार्थियों को मिलेगा। विद्यार्थी को 12वीं की परीक्षा पहले प्रयास में पास करनी होगी। इसके साथ ही उसके कम से कम 70 प्रतिशत अंक और अपने स्कूल में प्रथम स्थान होना जरूरी है।
योजना में सभी संकायों के पात्र विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। इस बार पहली बार न्यूनतम 70 प्रतिशत अंक की शर्त लागू की गई है।
जुलाई 2026 के शासन आदेश के अनुसार मुख्यमंत्री स्कूटी योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 495 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति दी गई है।
ई-स्कूटी के लिए 1.20 लाख और मोटराइज्ड वाहन के लिए 90 हजार
पात्र विद्यार्थी निर्धारित श्रेणी में अपनी पसंद का वाहन चुन सकेंगे। योजना के तहत ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपए और मोटराइज्ड वाहन के लिए अधिकतम 90 हजार रुपए तक की राशि दी जाएगी।
इस राशि में वाहन की एक्स-शोरूम कीमत के साथ रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस, दो हेलमेट और जरूरी एसेसरीज का खर्च भी शामिल रहेगा।
खाते में पैसे आने से पहले वाहन खरीदा तो कार्रवाई
सरकार ने वाहन खरीदने को लेकर भी स्पष्ट नियम बनाए हैं। विद्यार्थी के बैंक खाते में योजना की राशि पहुंचने से पहले वाहन खरीदना नियमों के खिलाफ होगा। ऐसा होने पर विद्यार्थी के साथ उसके पालक और संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
पहले लेना होगा डीलर से कोटेशन
वाहन खरीदने से पहले विद्यार्थी को अधिकृत वाहन विक्रेता के शोरूम से कोटेशन लेना होगा। इसमें वाहन की एक्स-शोरूम कीमत के साथ रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और एसेसरीज का पूरा विवरण दर्ज रहेगा।
विद्यार्थी यह कोटेशन स्कूल के प्राचार्य को देगा। प्राचार्य इसे संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भेजेंगे। इसके बाद स्वीकृत राशि विद्यार्थी के बैंक खाते में भेजने की प्रक्रिया पूरी होगी।
मनमर्जी का कोई भी वाहन नहीं खरीद सकेंगे
योजना की राशि से विद्यार्थी अपनी पसंद का कोई भी वाहन नहीं खरीद सकेगा। निर्धारित श्रेणी में आने वाला वाहन ही खरीदा जा सकेगा। जिला शिक्षा अधिकारियों को कोटेशन की जांच कर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उसमें योजना के तहत स्वीकृत वाहन के अलावा कोई दूसरा वाहन शामिल न हो।
कलेक्टर की अध्यक्षता में होगी निगरानी
योजना की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। इसमें जिला परिवहन अधिकारी और जिला कोषालय अधिकारी सदस्य होंगे, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी सदस्य सचिव रहेंगे।
समिति वाहन के चयन, भुगतान और वितरण से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की निगरानी और समन्वय करेगी।

