बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत परसवाड़ा में साप्ताहिक बाजार-बैठकी (Market Auction) की नीलामी में हुए कथित वित्तीय घोटाले और लाखों रुपये की हेराफेरी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर ने एक कड़ा आदेश पारित किया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर, बालाघाट को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों के आधार पर उचित सुनवाई के बाद 90 दिनों के भीतर वैधानिक और स्पष्ट आदेश पारित किया जाए।
क्या है पूरा मामला और किसकी है मिलीभगत?
शिकायतकर्ता और याचिकाकर्ता तुषार जायसवाल (निवासी वार्ड नंबर 10, सेरपार रोड, परसवाड़ा) के अनुसार, वर्ष 2025-2026 के दौरान परसवाड़ा ग्राम पंचायत के साप्ताहिक बाजार की नीलामी लगभग 12 लाख 41 हजार रुपये में हुई थी, जिसका आधा हिस्सा नियमानुसार जमा किया जाना था।
आरोप है कि ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव और ठेकेदार की मिलीभगत से नीलामी की आधी राशि शासन के खाते में पूरी जमा नहीं कराई गई। सार्वजनिक रूप से लगभग 6 लाख 21 हजार रुपये की रिकवरी बनती थी, जिसके मुकाबले कथित तौर पर मात्र 60,000 रुपये और कुछ अन्य छोटे टुकड़ों में कुल मिलाकर लगभग 4.5 लाख रुपये ही जमा किए गए और शेष राशि में बड़ा घोटाला कर दिया गया।
प्रतिवादी सरपंच-सचिव और ठेकेदार पर FIR की मांग
हाई कोर्ट में दायर याचिका में प्रमुख रूप से यह मांग उठाई गई है कि:
1. इस पूरे वित्तीय भ्रष्टाचार में शामिल ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव एवं संबंधित ठेकेदार की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच हो।
2. 6,21,000/- रुपये की बकाया और हेराफेरी की गई राशि की सीधी रिकवरी इन जिम्मेदार पक्षों से की जाए।
3. संलिप्त पाए जाने वाले सरपंच, सचिव और अन्य दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करते हुए तत्काल एफआईआर (FIR) और विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए जाएं।
एक साल की लंबी दौड़ और हाई कोर्ट का दरवाजा
याचिकाकर्ता तुषार जायसवाल का कहना है कि वे पिछले एक साल से इस भ्रष्टाचार के खिलाफ जिला पंचायत सीईओ, जनपद पंचायत सीईओ, कलेक्टर और एसडीओ स्तर के अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे। लगभग 20 बार लिखित शिकायतें और ज्ञापन सौंपने के बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई ठोस जांच या कार्रवाई नहीं हुई, क्योंकि कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर सरपंच-सचिव और जांच अधिकारियों के बीच मिलीभगत बनी रही।
जब स्थानीय स्तर पर कोई न्याय नहीं मिला, तब उन्हें मजबूर होकर जनहित में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में रिट याचिका (WP No. 42218/2026) दायर करनी पड़ी।
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद कलेक्टर कार्यालय में हलचल
माननीय उच्च न्यायालय के 26 अक्टूबर 2026 के आदेश के परिपालन में, याचिकाकर्ता ने 3 नवंबर 2026 को जिला कलेक्टर कार्यालय, बालाघाट में तमाम सबूतों और दस्तावेजों के साथ लिखित आवेदन प्रस्तुत कर दिया है।
उच्च न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक:
15 दिनों के भीतर: याचिकाकर्ता को कलेक्टर के समक्ष संपूर्ण दस्तावेज और शिकायत प्रस्तुत करनी थी, जिसे विधिवत जमा कर दिया गया है।
90 दिनों के भीतर: कलेक्टर, बालाघाट को प्रतिवादी बनाए गए लोगों (जिसमें ठेकेदार राजाराम गजभिये व अन्य संबंधित पक्ष शामिल हैं) सहित सभी पक्षों को सुनने का अवसर देकर 90 दिनों के भीतर विस्तृत और न्यायसंगत आदेश पारित करना होगा।
इस हाई कोर्ट के आदेश और सरपंच-सचिव पर संभावित एफआईआर की तलवार लटकने से स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

