भोपाल। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सियासी टकराव के केंद्र में आ गया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं, वहीं ओबीसी महासभा ने फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने और प्रदेशव्यापी आंदोलन की तैयारी शुरू करने की बात कही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर आरक्षण लागू करने में जल्दबाजी और कानूनी खामियां छोड़ने का आरोप लगाया है। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी इस मामले में कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब सरकार की अगली कानूनी कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट में संभावित चुनौती पर नजर रहेगी। इस पूरे विवाद का असर प्रदेश की आगामी भर्तियों और ओबीसी आरक्षण की व्यवस्था पर पड़ सकता है।
सीएम बोले- कांग्रेस के अध्यादेश में थीं कानूनी खामियां
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 2019 में अध्यादेश के जरिए ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने में जल्दबाजी की थी। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से परामर्श भी नहीं लिया गया था। राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले का विधिक परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, हाईकोर्ट ने 2019 से 2022 के बीच हुई नियुक्तियों के संबंध में 13 प्रतिशत अतिरिक्त नियुक्तियों को संरक्षण देते हुए आगामी भर्तियों में समायोजित करने का निर्देश दिया है। वहीं, 2022 के बाद फैसले की तारीख तक की भर्तियों में 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं।
हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस को ठहराया जिम्मेदार
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक लाभ लेने की जल्दबाजी में आरक्षण बढ़ाने का फैसला तो किया, लेकिन उसे मजबूत कानूनी आधार देने के लिए जरूरी तैयारी नहीं की। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले की कंडिका 215 का हवाला देते हुए दावा किया कि अदालत ने 2019 के अध्यादेश को पर्याप्त तैयारी के अभाव और अनुचित जल्दबाजी में लाने का उल्लेख किया है। खंडेलवाल के मुताबिक, कांग्रेस अब अपनी कानूनी चूक की जिम्मेदारी से बचने के लिए भाजपा पर आरोप लगा रही है।
ओबीसी महासभा सुप्रीम कोर्ट जाएगी
दूसरी ओर, हाईकोर्ट के फैसले से ओबीसी महासभा नाराज है। संगठन का कहना है कि आरक्षण घटने से ओबीसी युवाओं के हित प्रभावित होंगे और हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर अनिश्चितता बनी रहेगी। महासभा के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य और याचिकाकर्ता लोकेंद्र गुर्जर ने कहा कि संगठन फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा।
गुर्जर ने कहा कि ओबीसी वर्ग को केवल आश्वासनों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। संगठन कानूनी लड़ाई के साथ अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन भी करेगा। महासभा प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी कर रही है।

