Sunday, November 8, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsमप्र राज्यसभा चुनाव...सियासी सस्पेंस बरकरार: तीसरी सीट आएगी नहीं तो कहां जाएगी?...

मप्र राज्यसभा चुनाव…सियासी सस्पेंस बरकरार: तीसरी सीट आएगी नहीं तो कहां जाएगी? सीएम के बयान से गरमाई राजनीति

भोपाल। मप्र की तीन राज्यसभा सीटों के चुनाव में भले ही भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने घोषित उम्मीदवारों के साथ मैदान में उतर चुकी हों, लेकिन तीसरी सीट को लेकर सियासी गलियारों में रहस्य और रोमांच लगातार बढ़ता जा रहा है। भाजपा की गतिविधियों और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के एक बयान ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है।

भाजपा उम्मीदवार तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल ने नामांकन दाखिल कर दिया है, जबकि कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन मैदान में हैं। हालांकि भाजपा द्वारा आवश्यकता से अधिक नामांकन फॉर्म भरने, विधायकों को भोपाल में रुकने के निर्देश देने और संगठन की रणनीतिक चुप्पी ने तीसरे उम्मीदवार की संभावनाओं को हवा दे दी है।

इंदौर में पत्रकारों द्वारा तीसरी राज्यसभा सीट को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘तीसरी सीट आएगी नहीं तो कहां जाएगी।’ मुख्यमंत्री के इस संक्षिप्त लेकिन संकेतपूर्ण बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी का फिलहाल ऐसा कोई विचार नहीं है। उनका कहना है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों के पास अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।

इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा पर्दे के पीछे तीसरी सीट के लिए संभावनाएं तलाश रही है। कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भाजपा के लिए चुनावी गणित साधने की गुंजाइश बढ़ी है। पार्टी कांग्रेस के भीतर संभावित असंतोष और क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं पर भी नजर बनाए हुए है। सूत्रों के अनुसार भाजपा तीसरी सीट के लिए किसी प्रभावशाली आदिवासी चेहरे या फिर किसी निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह आगामी चुनावों से पहले बड़ा राजनीतिक संदेश माना जाएगा।

वोटों का गणित

विधानसभा के वर्तमान गणित के अनुसार 228 विधायक मतदान के पात्र हैं और एक सीट जीतने के लिए 57 वोट आवश्यक हैं। भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 63 विधायक हैं। दो सीटें जीतने के बाद भाजपा के पास करीब 50 वोट बचेंगे, ऐसे में तीसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।

8 जून पर टिकी सबकी नजरें

नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून होने के कारण अब सभी की नजरें भाजपा के अगले कदम पर टिकी हैं। फिलहाल राजनीतिक मंच पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा तीसरी सीट पर कोई बड़ा दांव खेलने जा रही है, या फिर यह केवल सियासी सस्पेंस है।

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

1 to 7 November 2026
25 to 31 October 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन