बिहार: बैंक कर्मचारियों की एक दिवसीय हड़ताल के कारण शुक्रवार को बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर हुई इस हड़ताल से सार्वजनिक, निजी और ग्रामीण बैंकों की करीब सात हजार शाखाओं में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। इस दौरान लगभग 30 हजार बैंक अधिकारी और कर्मचारी काम से दूर रहे, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
करोड़ों का लेनदेन प्रभावित ग्राहकों की बढ़ी मुश्किलें
हड़ताल के कारण नकद निकासी, चेक जमा, डिमांड ड्राफ्ट और अन्य जरूरी वित्तीय कार्य पूरी तरह से रुक गए। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव डीएन त्रिवेदी के अनुसार, इस एक दिन की हड़ताल से लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का बैंकिंग लेनदेन प्रभावित हुआ। इसके अलावा, क्लियरिंग हाउस बंद रहने की वजह से कई महत्वपूर्ण भुगतान भी बीच में ही अटक गए, जिससे व्यापारियों और आम नागरिकों को आर्थिक मोर्चे पर भारी असुविधा हुई।
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कर्मचारियों की प्रमुख मांगें और भविष्य की चेतावनी
बैंक कर्मियों ने अपनी पुरानी मांगों को एक बार फिर से पुरजोर तरीके से उठाया है। उनकी मुख्य मांगों में शामिल हैं,सप्ताह में केवल पांच दिन बैंकिंग कार्य दिवस लागू करना।परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) में समानता लाना।सभी रिक्त पदों पर तत्काल नई बहाली करना।समय पर पदोन्नति और पेंशन योजनाओं को अपडेट करना।
यूनियन ने सरकार और प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी इन मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आगामी 28, 29 और 30 सितंबर को एक बार फिर से तीन दिनों की देशव्यापी हड़ताल की जाएगी, जिससे बैंकिंग कामकाज और अधिक प्रभावित हो सकता है।

